चंगाई सभा को लेकर विवाद, धर्मांतरण के आरोप पर 4 हिरासत में
रायपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत कटोरा तालाब स्थित एक निजी कैफे में आयोजित चंगाई सभा को लेकर सोमवार को विवाद की स्थिति बन गई। आरोप है कि सभा के दौरान धर्मांतरण और हिंदू देवी-देवताओं के कथित अपमान को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर चार लोगों को हिरासत में लिया है और मामले की जांच जारी है।
क्या है मामला?
जानकारी के अनुसार, सिविल लाइन क्षेत्र के डिवाइन कैफे में एक प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 100 से 150 लोग शामिल हुए। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सभा के दौरान ईसाई धर्म अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा था और कथित रूप से नौकरी व इलाज जैसी सुविधाओं का आश्वासन दिया गया।
सभा की सूचना मिलने पर हिंदू संगठन के कुछ सदस्य मौके पर पहुंचे और विरोध जताया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और नारेबाजी हुई। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस को सूचना दी गई।
मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और चार लोगों सैफीन, आमीन, उदय और श्रीकांत को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पाए जाने पर संबंधित कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
धर्मांतरण कानून पर एक नजर
छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है। इस कानून के तहत बलपूर्वक, प्रलोभन या कपट से कराए गए धर्मांतरण को दंडनीय अपराध माना गया है। दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक की सजा या जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है।
राज्य सरकार द्वारा कानून को और प्रभावी बनाने के लिए संशोधन प्रस्ताव पर भी विचार किया गया है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, धर्म परिवर्तन से पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला प्रशासन को सूचना देना अनिवार्य हो सकता है।
हाल के समय में कोरबा और कांकेर जैसे जिलों में भी प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद की घटनाएं सामने आई हैं। प्रशासन का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी भी समुदाय को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
