छत्तीसगढ़ की बाघिन ‘बिजली’ की वनतारा में मौत:3 दिन पहले इलाज के लिए भेजे थे गुजरात

जामनगर। जंगल सफारी की प्रसिद्ध मादा बाघ बिजली की शुक्रवार को गुजरात स्थित वनतारा वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर में उपचार के दौरान मौत हो गई। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ अरुण कुमार पाण्डेय ने इसकी पुष्टि की है। बिजली किडनी और गर्भाशय की गंभीर बीमारी से जूझ रही थी।

उपचार के लिए गुजरात ले जाया गया

वनमंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर मंगलवार को वन अधिकारियों ने बिजली को ट्रेन के जरिए गुजरात ले जाकर उपचार कराया। वनतारा प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर भी बिजली की मृत्यु की पुष्टि की। सफारी प्रबंधन के अनुसार, बीमारी के लक्षण दिखने पर बेहतर इलाज के लिए बिजली को वनतारा भेजा गया। वनतारा में वन्यजीवों के लिए विश्वस्तरीय उपचार सुविधाएँ उपलब्ध हैं। बिजली की मौत की खबर मिलते ही जंगल सफारी के डायरेक्टर थेजस शेखर भी गुजरात के लिए रवाना हो गए।

जंगल सफारी में हाईटेक सुविधाओं के बावजूद सवाल

जंगल सफारी में वन्यजीवों के लिए उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का दावा किया जाता रहा है। बावजूद इसके, बिजली को डेढ़ हजार किलोमीटर दूर गुजरात ले जाने के निर्णय पर विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं। वन्यजीव जानकारों का कहना है कि अंजोरा स्थित कामधेनु विश्वविद्यालय में भी विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं और बिजली का उपचार वहीं कराया जा सकता था।

लंबी यात्रा ने बिगाड़ी सेहत

जानकारों के अनुसार, पिंजरे में कैद बिजली लंबी यात्रा से अत्यधिक थक गई थी, जिससे उसकी सेहत और बिगड़ गई। बिजली की किडनी और गर्भाशय की बीमारी की जानकारी अगस्त में ही मिली थी। बीमारी बढ़ने के कारण बिजली ने खाना-पीना भी छोड़ दिया था।

अंतिम सांस वहीं ली, जहां पिता लाए गए थे

नौ साल पहले जंगल सफारी के उद्घाटन के समय गुजरात से नर बाघ शिवाजी को लाया गया था। बिजली उसी शिवाजी की पहली बाघ शावक थी। जिस राज्य से उसके पिता को लाया गया था, वहीं बिजली ने अपनी अंतिम सांसें ली।

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