छत्तीसगढ़ में नई जमीन गाइडलाइन दरों पर विवाद भड़का: क्रेडाई और ब्रोकर्स सड़क पर, रजिस्ट्री रुकवाने की धमकी
रायपुर। राजधानी रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में 20 नवंबर 2025 से लागू नई जमीन गाइडलाइन दरों को लेकर रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मच गया है। बिल्डरों का प्रमुख संगठन छत्तीसगढ़ क्रेडाई (CREDAI) और प्रॉपर्टी ब्रोकर्स ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। क्रेडाई का दावा है कि नई दरों से कई जगहों पर सरकारी कीमत बाजार रेट से कई गुना बढ़ गई है, जिससे रजिस्ट्री शुल्क आसमान छू रहा है। ब्रोकर्स ने चेतावनी दी है कि लोग कम कीमत पर जमीन खरीदेंगे, लेकिन ऊंची गाइडलाइन पर रजिस्ट्री शुल्क देने से मना कर देंगे, जिसका असर पूरे सेक्टर पर पड़ेगा।
20 नवंबर से लागू, 700 जगहों पर दरें तय
पंजीयन एवं स्टांप विभाग ने 19 नवंबर को अधिसूचना जारी कर 2025-26 के लिए नई गाइडलाइन दरें लागू कर दीं। पहले 1,500 से अधिक जगहों को आधार बनाकर दरें तय की जाती थीं, लेकिन अब संख्या घटाकर करीब 700 कर दी गई है। केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की हालिया बैठक में मंजूर इन दरों से कुछ इलाकों में 18-20% तक की बढ़ोतरी हुई है। विभाग का कहना है कि यह बाजार की वास्तविक स्थिति के अनुरूप है, लेकिन क्रेडाई इसे “जनविरोधी” बता रही है।
क्रेडाई के अनुसार, नई दरें 11 नवंबर की अधिसूचना पर आधारित हैं, जो अवैध और बाजार से मेल नहीं खातीं। इससे ग्रामीण-शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जबकि सुविधाएं सीमित हैं। ब्रोकर्स ने कहा कि रियल एस्टेट कारोबार ठप हो जाएगा, क्योंकि खरीदार ऊंचे स्टांप ड्यूटी से बचने के लिए रजिस्ट्री टाल देंगे।
ब्रोकर्स का प्रदर्शन.. रजिस्ट्री रुकवाने का ऐलान
रायपुर के रजिस्ट्रार कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में ब्रोकर्स प्रदर्शन करने पहुंचे। उन्होंने बैनर-स्लोगन के साथ नारेबाजी की और कलेक्टर गाइडलाइन में 30% छूट समाप्त करने का विरोध किया। एक ब्रोकर ने कहा, “लोग 20 लाख की जमीन पर 5 लाख का स्टांप देंगे, जो असंभव है। हम रजिस्ट्री प्रक्रिया रोक देंगे।” प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा, जिसमें दरें वापस लेने की मांग की।
क्रेडाई की प्रमुख मांगें ? छूट बहाल, एक समान दरें
क्रेडाई ने नई गाइडलाइन के कुछ बदलावों का स्वागत किया, लेकिन अधिकांश पर आपत्ति जताई। संगठन के अध्यक्ष ने कहा, “दरें बाजार से कई गुना ऊंची हो गईं, जिससे सेक्टर ठप हो जाएगा।”
1 |गाइडलाइन दरों में 11 नवंबर 2025 की अधिसूचना के तहत हुई बढ़ोतरी वापस ली जाए; इसे अवैध और जनविरोधी बताया गया। |
2 सभी प्रकार की जमीन (आवासीय, व्यावसायिक) पर एक समान प्रति वर्ग मीटर मूल्य तय हो; वर्तमान में भिन्नता से भ्रम है। |
3 वार्षिक वृद्धि (0.30% और 0.60%) को अनुचित बताते हुए रद्द किया जाए; इससे लगातार बोझ बढ़ेगा। |
4 ग्रामीण-शहरी जनता पर आर्थिक दबाव कम हो; सुविधाओं के अभाव में दरें तर्कसंगत रखी जाएं। |
5 स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क में 19 नवंबर 2025 से लागू वृद्धि रद्द हो; बाजार स्थिति से मेल न खाने का आरोप। |
6 गैर-पारिवारिक खरीदारों के लिए अंश के आधार पर गणना; रकबे के बजाय खरीदार संख्या से दरें बढ़ रही हैं। |
7 पंजीयन शुल्क 4% पर सीमित रखा जाए; बहुमंजिला भवनों में ऊपरी मंजिलों पर निर्माण लागत छूट बहाल हो। |
8 कलेक्टर गाइडलाइन में 30% छूट समाप्त न हो; पहले 0.8% शुल्क लागू हो, जो गाइडलाइन मूल्य तक सीमित रहे। |
9 व्यावसायिक/आवासीय इमारतों में सेकंड फ्लोर एवं ऊपरी मंजिलों पर छूट यथावत रखी जाए। |
10 जहां सरकारी दर बाजार से ज्यादा हो, वहां पुनः जांच कर नई दरें तय हों। |
पंजीयन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि नई गाइडलाइन बाजार सर्वे पर आधारित है और राजस्व संग्रह को मजबूत करेगी। पहले की दरें पुरानी हो चुकी थीं, इसलिए अपडेट जरूरी था। हालांकि, विरोध को देखते हुए विभाग ने स्पष्ट किया कि आपत्तियों पर विचार किया जाएगा। क्रेडाई ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो कोर्ट का रुख किया जाएगा, जैसा कि अन्य राज्यों (जैसे भोपाल) में हो चुका है।
यह विवाद छत्तीसगढ़ के रियल एस्टेट बाजार को प्रभावित कर सकता है, खासकर जब राज्य विकास के दौर से गुजर रहा है। ब्रोकर्स ने 25 नवंबर को बड़ा धरना देने का ऐलान किया है। अधिक अपडेट का इंतजार है।
