Chhattisgarh Land Price Hike: छत्तीसगढ़ में जमीन हुई महंगी! नई गाइडलाइन से 150% तक बढ़े रेट

Chhattisgarh Land Price Hike: छत्तीसगढ़ में जमीन खरीदना अब और महंगा हो गया है। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए नई कलेक्टर गाइडलाइन जारी कर दी है, जो 20 नवंबर से लागू हो चुकी है। राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में जमीन की सरकारी दरों में 10% से 150% तक की भारी बढ़ोतरी हुई है। आठ साल बाद हुई इस बड़े बदलाव का सीधा असर रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप ड्यूटी पर पड़ा है, जिससे घर, प्लॉट और मकान खरीदना पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है।

गाइडलाइन बढ़ने से रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप

नई दरों को लेकर रियल एस्टेट कारोबारी और ब्रोकर्स संगठन में नाराजगी बढ़ गई है। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट ब्रोकर्स एसोसिएशन ने आपात बैठक कर कहा कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी से उद्योग संकट में पड़ सकता है। एसोसिएशन के चेयरमैन महेश आर्या ने चेतावनी दी कि बढ़ी हुई गाइडलाइन गरीब, मध्यम वर्ग, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग के लिए जमीन खरीदना लगभग असंभव बना देगी।

उनका कहना है कि जमीन के महंगा होने से मकान, प्लॉट, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत भी बढ़ेगी, जिससे पूरे रियल एस्टेट बाजार पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

रायपुर के कई इलाकों में 150% तक उछली गाइडलाइन दरें

रायपुर शहर के कई प्रमुख वार्डों और मार्गों पर अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है—

ईश्वरी चरण शुक्ल वार्ड: 32,000 से बढ़कर 1,10,000 रुपये/मीटर

रमण मंदिर वार्ड: 1,00,000 से 1,45,000 रुपये/मीटर

इंदिरा गांधी वार्ड: 1,00,000 से 1,70,000 रुपये/मीटर

शहीद हेमू कल्याणी वार्ड: 1,00,000 से 1,95,000 रुपये/मीटर

शंकर नगर वार्ड: 40,000 से 75,000 रुपये/मीटर

मुख्य मार्गों पर भी कीमतों में छलांग

रिंग रोड–1 और जीई रोड: 30,000 से बढ़कर 60,000 रुपये/मीटर

टाटीबंध – RK मॉल ओवरब्रिज: 60,000 रुपये/मीटर

महोबा बाजार – भारत माता चौक: 36,000 रुपये/मीटर

वीर सावरकर नगर: 15,000 से बढ़कर 24,000 रुपये/मीटर

इसके अलावा अटल पथ, रायपुर–बिलासपुर मार्ग, स्टेशन रोड और फाफाडीह रोड जैसे प्रमुख कॉरिडोर में भी गाइडलाइन दरों में 40% से 150% तक की वृद्धि हुई है।

क्यों बढ़ाई गई दरें?

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से इन क्षेत्रों में बाजार मूल्य बढ़ रहे थे, लेकिन गाइडलाइन स्थिर थी। अब वास्तविक बाजार दरों के करीब लाने के लिए संशोधन किया गया है।

हालांकि कारोबारी संगठनों का मानना है कि इस कदम से-

रियल एस्टेट में मंदी

घर बनाने की लागत में भारी इजाफा

निवेश में गिरावट

जैसे असर देखने को मिल सकते हैं।

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