छत्तीसगढ़ में मंत्रियों और पुलिस अधिकारियों को अब नहीं मिलेगा “गार्ड ऑफ ऑनर”
रायपुर, 25 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार करते हुए मंत्रियों एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सामान्य दौरे, निरीक्षण या भ्रमण के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर (सलामी गारद) देने की औपनिवेशिक परंपरा को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। गृह विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा की विशेष पहल पर गृह विभाग ने इस पुरानी व्यवस्था की समीक्षा की और इसे बदलने का फैसला लिया। इसका मुख्य उद्देश्य पुलिस बल की कार्यक्षमता को अनावश्यक औपचारिकताओं से मुक्त कर कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और जनसेवा जैसे मूल कार्यों पर केंद्रित करना है।
आदेश के अनुसार, राज्य के भीतर सामान्य दौरों, आगमन-प्रस्थान या निरीक्षण के समय अब गृहमंत्री, अन्य सभी मंत्रियों, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तथा अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सलामी गारद नहीं दी जाएगी। जिला भ्रमण या सामान्य निरीक्षण के दौरान पहले प्रचलित यह व्यवस्था अब पूरी तरह समाप्त हो गई है। इससे पुलिस कर्मियों का समय और ऊर्जा बचेगी, जिसका बेहतर उपयोग जनहित के कार्यों में होगा।
हालांकि, यह प्रतिबंध राष्ट्रीय एवं राजकीय आयोजनों पर लागू नहीं होगा। गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), शहीद पुलिस स्मृति दिवस (21 अक्टूबर), राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर), विभिन्न राजकीय समारोहों तथा पुलिस दीक्षांत परेड जैसे विशेष अवसरों पर सलामी गारद की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों (जैसे राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि) तथा विशिष्ट अतिथियों के लिए प्रोटोकॉल के अनुसार गार्ड ऑफ ऑनर की व्यवस्था यथावत रहेगी।
सरकार का कहना है कि यह कदम औपनिवेशिक सोच से जुड़ी परंपराओं को खत्म करने और आधुनिक, जनोन्मुखी प्रशासन की दिशा में एक बड़ा सुधार है। इससे पुलिस बल की कार्यक्षमता में सकारात्मक बदलाव आएगा और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव होगा।
