1460 गौधाम का दावा, फिर भी सड़कों पर हजारों गौवंश! आखिर योजना कहां अटकी?

1460 गौधाम का दावा

रायपुर: छत्तीसगढ़ में आवारा गौवंश की समस्या अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। राजधानी रायपुर समेत बिलासपुर, दुर्ग, धमतरी और सरायपाली की प्रमुख सड़कों पर बड़ी संख्या में गाय और बैल खुलेआम घूमते दिखाई दे रहे हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने के साथ-साथ किसानों की फसलें भी नुकसान झेल रही हैं। इसी बीच राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी गौधाम योजना की प्रगति और प्रभाव को लेकर कई सवाल खड़े होने लगे हैं।

1,460 गौधाम बनाने का रखा गया लक्ष्य

प्रदेश सरकार ने मार्च 2026 में बेसहारा गौवंश के संरक्षण के उद्देश्य से गौधाम योजना की शुरुआत की थी। योजना के तहत पूरे राज्य में 1,460 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। प्रत्येक विकासखंड में करीब 10 गौधाम विकसित किए जाने हैं, जिनमें एक-एक गौधाम में लगभग 200 पशुओं को रखने की क्षमता होगी। इस योजना के जरिए करीब 2.92 लाख बेसहारा गौवंश को आश्रय देने की तैयारी की गई है।

पहले चरण में कई जिलों में शुरू हुआ काम

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पहले चरण में 11 जिलों में 29 गौधाम शुरू किए गए हैं, जबकि 36 अन्य गौधामों को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। सरकार का दावा है कि योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है और आने वाले समय में इसकी गति और तेज होगी।

संचालन के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान

गौधामों के संचालन को सुचारु बनाने के लिए सरकार ने वित्तीय सहायता की व्यवस्था भी की है। चौथे वर्ष से प्रति पशु प्रतिदिन 35 रुपये अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा प्रत्येक गौधाम के रखरखाव के लिए 5 लाख रुपये वार्षिक सहायता, गौसेवकों को 13,126 रुपये और चरवाहों को 10,916 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की घोषणा की गई है। चारा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 47 हजार रुपये प्रति एकड़ (अधिकतम 5 एकड़) तक सहायता देने की भी योजना बनाई गई है।

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हाईकोर्ट ने भी मांगा जवाब

मई 2026 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गौधामों की स्थिति पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया था। अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में कुछ गौधामों में क्षमता से अधिक पशु होने, चारा-पानी की कमी और पशु चिकित्सा सुविधाओं के अभाव जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया। कोर्ट ने यह भी पूछा कि यदि गौधाम बनाए जा रहे हैं तो प्रदेश की सड़कों पर अब भी बड़ी संख्या में आवारा गौवंश क्यों दिखाई दे रहे हैं।

योजना की सफलता पर उठ रहे सवाल

सरकार का कहना है कि गौधाम योजना धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में लागू की जा रही है, लेकिन अब भी यह स्पष्ट नहीं है कि घोषित लक्ष्य के मुकाबले कितने गौधाम पूरी तरह संचालित हो चुके हैं। साथ ही यह भी सवाल उठ रहे हैं कि अब तक इस योजना पर कितना बजट खर्च हुआ और क्या इससे वास्तव में सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं की संख्या में कमी आई है। योजना के प्रभाव का सही आकलन इसके जमीनी परिणाम सामने आने के बाद ही संभव होगा।

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