पुराना विधानसभा भवन अलविदा: रजत जयंती पर भावुक विदाई, डॉ. रमन सिंह ने गिनाए 23 साल के विकास के मील के पत्थर

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पुराने भवन का अंतिम सत्र सोमवार को एक दिवसीय विशेष सत्र के रूप में संपन्न हुआ। यह सत्र विधानसभा के रजत जयंती वर्ष का समापन और पुराने भवन को भावुक विदाई का अवसर बना। सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं ने अपने संसदीय जीवन के अनुभव साझा किए तथा राज्य के 25 वर्षों के विकास यात्रा को याद किया।

 

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में भावुक स्वर में कहा कि वे पिछले 23 वर्षों से इस विधानसभा के साक्षी रहे हैं – 15 वर्ष मुख्यमंत्री के रूप में, 5 वर्ष विपक्ष के नेता के रूप में और अब अध्यक्ष के रूप में। उन्होंने कहा, “विकास की सारी गाथाएं, सारे काम आज मील का पत्थर बन चुके हैं। न्यूट्रीशनल सिक्योरिटी एक्ट इसी विधानसभा का चमत्कार है। एक रुपया किलो चावल, गुड़-चना वितरण, बच्चों के लिए स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, हर जिले में कौशल विकास इकाइयाँ, किसानों के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण, एक मेडिकल कॉलेज से 15 और एक नर्सिंग कॉलेज से 84 तक का विस्तार, 212 से 400 से अधिक कॉलेज, 40 हजार नए स्कूल भवन, पूरे प्रदेश में सड़क नेटवर्क, 15-20 हजार किलोमीटर नेशनल हाइवे और 30 हजार किलोमीटर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के काम – ये सब इसी विधानसभा से संभव हुए।”

 

डॉ. रमन सिंह ने याद दिलाया कि भाजपा को 20 वर्षों तक (15 + 5 वर्ष) बहुमत के साथ काम करने का अवसर मिला। उन्होंने पुराने भवन के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि यह भवन कभी जल संसाधन विभाग का रिसर्च इंस्टीट्यूट था। अजीत जोगी के मुख्यमंत्री बनने पर पहला विधानसभा सत्र टेंट में लगा था, फिर यहाँ शिफ्ट हुआ और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों नए अत्याधुनिक विधानसभा भवन का उद्घाटन हो चुका है। नए भवन में शीतकालीन सत्र 10 से 14 दिसंबर तक होगा।

 

अध्यक्ष ने कहा, “इस मिट्टी से जुड़ा रहा हूँ। जाने से पहले स्पीकर की आसंदी को पैर छूकर प्रणाम करूँगा, क्योंकि यही आसंदी मुझे नए दायित्वों के लिए तैयार करती रही।” उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष का पद संवैधानिक दायित्व बताते हुए इसे अपने लिए गौरवशाली बताया।

 

सत्र में कुल 25 सदस्यों ने अपने संस्मरण साझा किए – 15 भाजपा और 10 कांग्रेस के। अध्यक्ष ने इसे रजत जयंती वर्ष में 25 भाषणों का सुंदर संयोग बताया। सत्र पूर्णतः सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

 

अध्यक्ष ने मीडिया को धन्यवाद देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का मीडिया नियम-कानून का पालन करते हुए बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करता है और देश के किसी भी कोने में इसे उदाहरण के तौर पर दिया जा सकता है।

 

सत्र के बाद डॉ. रमन सिंह ने सोशल मीडिया पर स्पीकर की आसंदी को प्रणाम करते हुए अपनी कविता साझा की:

 

“नमन तुझे मेरी विधानसभा,

तू लोकतंत्र का आधार रही।

जब यहाँ विचारधाराएँ जुटी,

तू वटवृक्ष की भांति छाँव बनी।

यह भवन मेरा विद्यालय था,

जिससे आगे अब जाना है।

मैं भावुक हूँ, आशान्वित हूँ,

तेरे महत्व को ऐसे पहचाना है।

है प्रण मेरा कि सब अर्पित करके भी

नए सदन को नव गरिमा तक पहुँचाना है।

नमन तुझे मेरी विधानसभा।”

इसके साथ ही छत्तीसगढ़ विधानसभा ने अपने पुराने भवन को अलविदा कह दिया और नए युग की ओर कदम बढ़ाया।

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