भाजपा के आत्मनिर्भर भारत सम्मेलन से पहले नेता को नजरबंद किया, माली समाज के विरोध के बाद रिहा
गरियाबंद : छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश स्तरीय ‘आत्मनिर्भर भारत सम्मेलन’ के दौरान एक अप्रत्याशित घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। देवभोग के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब किसी प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होने से पहले एक स्थानीय भाजपा नेता को पुलिस ने नजरबंद कर दिया। पूर्व जिला मंत्री और माली समाज के प्रमुख नेता चमार सिंह पात्र को जिला संगठन की नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को प्रदेश नेताओं के सामने उजागर करने से रोकने के लिए यह कदम उठाया गया। समाज के विरोध के बाद उन्हें रिहा कर मंच पर वापस आने दिया गया।
कार्यक्रम से पहले नजरबंदी का विवरण
दोपहर ढाई बजे शुरू हुए विधानसभा स्तरीय आत्मनिर्भर भारत सम्मेलन में प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी, कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त चंदूलाल साहू समेत भाजपा के कई दिग्गज नेता मौजूद थे। आयोजन से ठीक पहले यह अफवाह मंच के आसपास फैल गई कि चमार सिंह पात्र जिला संगठन की नियुक्तियों में हुई विसंगतियों—जैसे पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करना—पर गंभीर आरोप लगाने वाले थे।
कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने और किसी विवाद से बचने के लिए स्थानीय पुलिस ने चमार सिंह को थाने में बिठाकर नजरबंद कर दिया। सूचना मिलते ही पंडरा माली समाज के सदस्यों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। समाज के ‘हल्ला बोल’ के बाद चमार सिंह को तुरंत रिहा कर दिया गया और उन्हें मंच पर वापस आने की अनुमति दी गई। इस घटना ने न केवल स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा किया, बल्कि संगठन के आंतरिक कलह को भी उजागर कर दिया।
चमार सिंह का आरोप: “पुराने कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय”
रिहा होने के बाद चमार सिंह पात्र ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “मैंने क्या अपराध किया? मेरा कसूर केवल इतना है कि मैं संगठन की नियुक्तियों में हुई गड़बड़ियों को अपने ही नेताओं के सामने रखना चाहता था। पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को ठिकाने न देना, और जब आवाज उठाने की कोशिश करें तो पुलिस कस्टडी में भेज देना—यह कितना उचित है?” उन्होंने कहा कि यह घटना भाजपा के उन मूल्यों के खिलाफ है जो पार्टी हमेशा लोकतंत्र और आंतरिक लोकतंत्र की बात करती है।
चमार सिंह, जो माली समाज के सक्रिय नेता हैं, ने पहले भी जिला स्तर पर संगठन की नियुक्तियों को लेकर असंतोष व्यक्त किया था। उनका दावा है कि नए चेहरों को प्राथमिकता देकर वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है, जो पार्टी की जमीनी ताकत को कमजोर कर रही है।
माली समाज का आक्रोश और राजनीतिक निहितार्थ
देवभोग क्षेत्र में माली समाज का प्रभावी वोट बैंक है, और इस घटना से समाज में व्यापक असंतोष फैल गया है। समाज के नेताओं ने कहा कि भाजपा का यह कदम न केवल एक कार्यकर्ता के साथ अन्याय है, बल्कि समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला भी है। एक समाज सदस्य ने कहा, “हम भाजपा के साथ हैं, लेकिन आंतरिक साफ-सफाई जरूरी है। ऐसे कदम पार्टी को कमजोर करेंगे।”
यह घटना भाजपा के छत्तीसगढ़ संगठन में चल रही आंतरिक उथल-पुथल को दर्शाती है, खासकर विधानसभा चुनावों के बाद। प्रदेश नेतृत्व ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कार्यकर्ता संगठन से मांग कर रहे हैं कि नियुक्तियों की जांच हो और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
आत्मनिर्भर भारत सम्मेलन का आयोजन भाजपा की केंद्रीय योजना का हिस्सा है, जो आर्थिक स्वावलंबन और स्थानीय उद्यमिता पर केंद्रित है। हालांकि, इस घटना ने कार्यक्रम की छवि को धूमिल कर दिया और देवभोग को राजनीतिक समाचारों के केंद्र में ला खड़ा किया।
