बिलासपुर में खाकी पर दाग? दुष्कर्म मामले में रोते हुए SSP दफ्तर पहुंचे मासूमों के परिजन, थाना प्रभारी पर लगाए गंभीर आरोप

Bijapur Gangrape News

7 और 8 साल की दो सगी बच्चियों से दरिंदगी का मामला; पुलिस पर FIR में देरी, सबूत मिटाने और रफा-दफा करने के लिए समझौते का दबाव बनाने का आरोप, SSP ने दिए जांच के आदेश

शॉर्ट डिस्क्रिप्शन: छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर से कानून-व्यवस्था और खाकी को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद सनसनीखेज खबर आ रही है। दो मासूम बच्चियों के साथ हुई दरिंदगी के मामले में न्याय की गुहार लगाने पहुंचे पीड़ित परिवार को पुलिस ने ही कथित तौर पर प्रताड़ित कर डाला! रोते-बिलखते हुए एसएसपी दफ्तर पहुंचे परिजनों ने थाना प्रभारी और जांच अधिकारियों पर जो संगीन आरोप लगाए हैं, उसने पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। रक्षक ही जब भक्षक की भूमिका में आ जाएं, तो इंसान कहां जाए? पुलिसिया लापरवाही की ये खौफनाक इनसाइड स्टोरी तुरंत पढ़ें।

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की न्यायधानी कहे जाने वाले बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी थाना क्षेत्र से इंसानियत को झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया है। यहाँ 7 और 8 वर्षीय दो मासूम बच्चियों के साथ उनके ही एक पड़ोसी नाबालिग द्वारा कथित तौर पर दुष्कर्म (दरिंदगी) किए जाने की गंभीर वारदात हुई है। लेकिन इस संवेदनशील मामले में इंसाफ दिलाने के बजाय, बिलासपुर पुलिस की अपनी ही कार्यप्रणाली और भूमिका पर बेहद गंभीर और संगीन सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय आरोपी पक्ष को खुला संरक्षण दे रही है।

घंटो भटकाया, बयान और सबूतों को किया दरकिनार

मामले में स्थानीय पुलिस से हताश और डरे-सहमे परिजन न्याय की गुहार लेकर रोते-बिलखते हुए सीधे बिलासपुर एसएसपी (SSP) कार्यालय पहुंचे। परिजनों ने उच्चाधिकारियों के सामने आपबीती सुनाते हुए सिरगिट्टी पुलिस के रवैये पर कई गंभीर आरोप लगाए:

FIR दर्ज करने में आनाकानी: परिजनों का कहना है कि घटना की तत्काल सूचना और शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने समय पर एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की। पीड़ित परिवार को थानों के चक्कर लगवाकर घंटों परेशान और प्रताड़ित किया गया। इतनी बड़ी वारदात के बाद भी पुलिस ने महज खानापूर्ति करते हुए केवल एक ही एफआईआर दर्ज की।

सबूतों की अनदेखी: बच्चियों द्वारा आरोपी के खिलाफ स्पष्ट बयान देने और मौके पर मौजूद भौतिक साक्ष्यों (Physical Evidence) की जानकारी देने के बावजूद, जांच अधिकारी ने उन महत्वपूर्ण सबूतों को जब्त करने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई, जिससे सबूत नष्ट होने का खतरा पैदा हो गया है।

“समझौता कर लो…” -थाना प्रभारी और जांच अधिकारी पर सनसनीखेज आरोप

पीड़ित परिवार ने एसएसपी के सामने सिरगिट्टी थाना प्रभारी (TI), उप-निरीक्षक (SI) और केस के जांच अधिकारी पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप मढ़े हैं।

परिजनों का बड़ा बयान: “थाना प्रभारी और जांच अधिकारियों ने पूरी तरह से निष्पक्ष जांच को ताक पर रख दिया। वे हम पर लगातार दबाव बना रहे थे कि आरोपी पड़ोसी ही है, इसलिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर छोड़ने के लिए हम आपस में समझौता (राजीनामा) कर लें। बच्चियों को बार-बार थाने बुलाकर मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है।”

परिजनों ने यह भी बताया कि पुलिसिया संरक्षण मिलने के कारण आरोपी पक्ष के हौसले बुलंद हैं और उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, जिसकी वजह से पूरा पीड़ित परिवार खौफ के साए में जीने को मजबूर है।

मामले की गंभीरता को देख SSP ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश

मासूमों के साथ हुए अपराध और पुलिसकर्मियों पर लगे इन गंभीर आरोपों को देखते हुए बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने तुरंत मामले को संज्ञान में लिया है। उन्होंने एडिशनल एसपी सिटी (ASP City) को इस पूरे घटनाक्रम और इसमें स्थानीय पुलिस की क्या भूमिका रही, इसकी बारीकी से उच्चस्तरीय जांच करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

एसएसपी ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट सामने आते ही दोषी पुलिस अधिकारियों और आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह है कि न्यायधानी की पुलिस इन मासूमों को कब तक इंसाफ दिला पाती है।

यह भी पढ़ें: Meenakshi Natarajan के नामांकन विवाद में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री, चुनाव रोकने से किया इनकार

Meenakshi Natarajan के नामांकन विवाद में सुप्रीम कोर्ट की एंट्री, चुनाव रोकने से किया इनकार

Youthwings