बिहार SIR विवाद पर चुनाव आयोग का बड़ा बयान: ‘वोट चोरी का आरोप झूठा, संविधान का अपमान’

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और वोट चोरी के आरोपों को लेकर सियासत गर्म है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया था, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया। अब इस पूरे मामले पर खुद चुनाव आयोग सामने आया है और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जवाब दिया है।

वोट चोरी का आरोप झूठा – चुनाव आयोग

मुख्य चुनाव आयुक्त ने साफ कहा कि वोट चोरी का आरोप पूरी तरह झूठा है। उन्होंने कहा कि यह आरोप चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की साख पर सवाल खड़े करने और जनता को गुमराह करने की एक असफल कोशिश है। उनका कहना था कि “भारत के संविधान के मुताबिक हर 18 साल का नागरिक मतदाता बनने और वोट देने का हकदार है। इस पर सवाल उठाना संविधान का अपमान है।”

सुप्रीम कोर्ट और मतदाता सूची का मुद्दा

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मशीन-रीडेबल मतदाता सूची को साझा न करना सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप है, क्योंकि यह मतदाताओं की निजता से जुड़ा हुआ मामला है। इसके बावजूद कुछ राजनीतिक दल इसे लेकर भ्रम फैला रहे हैं। आयोग का कहना है कि बिहार में 7 करोड़ से ज्यादा मतदाता आयोग के साथ खड़े हैं और उनकी साख पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

ड्राफ्ट सूची पर आपत्ति दर्ज कराने का समय बाकी

आयोग ने बताया कि एक अगस्त से एक सितंबर तक का समय मतदाता सूची की ड्राफ्ट कॉपी में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए तय किया गया है। अब तक करीब 28 हजार दावे और आपत्तियां आ चुकी हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे किसी तरह का भ्रम फैलाने के बजाय नियमों के तहत अपनी आपत्तियां दर्ज कराएं।

सभी दल आयोग के लिए बराबर

चुनाव आयोग ने यह भी दोहराया कि उनके लिए न कोई पक्ष है और न विपक्ष, सभी राजनीतिक दल समान हैं। CEC ने कहा – “हर राजनीतिक दल का जन्म चुनाव आयोग से हुआ है। ऐसे में आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाना पूरी तरह निराधार है।”

राहुल गांधी से सबूत मांगते हुए आयोग सख्त

राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों पर चुनाव आयोग ने कहा कि अगर वह सच मानते हैं तो उन मतदाताओं के नाम और हलफनामा पेश करें जिनके साथ गड़बड़ी हुई है। आयोग ने यहां तक कह दिया कि अगर राहुल गांधी अपने आरोप साबित नहीं कर पाते हैं तो उन्हें सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी होगी।

विपक्षी दलों का आरोप और सुप्रीम कोर्ट का आदेश

बिहार में SIR को लेकर विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया से करोड़ों पात्र मतदाता कागजों के अभाव में वोट देने के अधिकार से वंचित हो जाएंगे। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख नामों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने को कहा है। इसमें यह भी बताना होगा कि किन कारणों से वे नाम हटाए गए।

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