बिहार में हथकड़ी लगाए नामाकंन करने पहुंचा इस पार्टी का प्रत्याशी, रोकर बताई आपबीती
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों के बीच गोपालगंज के बरौली विधानसभा क्षेत्र से एक अनोखा मामला सामने आया है। जेल में बंद कुख्यात अपराधी धर्मेंद्र क्रांतिकारी ने 17 अक्टूबर 2025 को तेज प्रताप यादव की जनशक्ति जनता दल (लोकतांत्रिक) से नामांकन पत्र दाखिल किया। हथकड़ी में जकड़े और कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच वह कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने निर्वाचन पदाधिकारी को अपना पर्चा सौंपा। यह घटना स्थानीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गई है।
धर्मेंद्र क्रांतिकारी के खिलाफ हत्या, अपहरण और रंगदारी जैसे गंभीर आरोपों सहित दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह वर्तमान में गोपालगंज जिला जेल में बंद हैं। नामांकन के दौरान उन्होंने जेल प्रशासन पर चुनाव न लड़ने के लिए दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया। इसके अलावा, उन्होंने बरौली के वर्तमान विधायक रामप्रवेश राय (भाजपा) पर साजिश रचकर उन्हें जेल भेजने का इल्जाम भी लगाया।
धर्मेंद्र ने दावा किया कि जनता का समर्थन उनके साथ है और वह चुनाव में मजबूती से हिस्सा लेंगे। नामांकन के दौरान कलेक्ट्रेट में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद थी। पुलिस उन्हें विशेष वाहन से लाई और नामांकन के बाद वापस ले गई। निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, जेल में बंद व्यक्ति कोर्ट की अनुमति से नामांकन दाखिल कर सकता है, हालांकि यह प्रक्रिया जटिल है।
बरौली सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, जहां मुख्य मुकाबला भाजपा के रामप्रवेश राय और अन्य दलों के बीच है। धर्मेंद्र का नामांकन विपक्षी दलों के लिए नया मोड़ ला सकता है, लेकिन उनके आपराधिक रिकॉर्ड के कारण वोट बैंक पर प्रभाव की संभावना कम मानी जा रही है। गोपालगंज जिला प्रशासन ने अभी तक आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय ने कहा कि यह मामला निर्वाचन आयोग के दायरे में है।
जेल अधीक्षक ने बताया कि नामांकन के लिए कोर्ट से अनुमति ली गई थी, और दबाव के आरोपों की जांच बिहार जेल विभाग द्वारा की जाएगी। नामांकन के बाद स्थानीय लोग और राजनीतिक कार्यकर्ता दो धड़ों में बंट गए हैं। विरोधी इसे “राजनीति के अपराधीकरण” का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि धर्मेंद्र के समर्थक इसे “लोकतंत्र की जीत” करार दे रहे हैं।
