भूपेश बघेल ने की भाजपा सरकार की तारीफ: बोले- ‘नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अमित शाह का सहयोग, सरकार ने विकास, सुरक्षा की नीति को आगे बढ़ाया’
भूपेश बघेल
जगदलपुर। शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर पुलिस लाइन में सबसे बड़े समर्पण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सीएम विष्णुदेव साय और डिप्टी सीएम की मौजूदगी में लगभग 210 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मौके पर सरकार की सराहना की और कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का सहयोग रहा।
भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर लिखा
पूर्व सीएम ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सरकार ने ‘विकास, विश्वास और सुरक्षा’ की नीति को आगे बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि 2018 में उनकी सरकार ने नक्सल उन्मूलन नीति बनाई, जिसके तहत कई कैंप खोले, सड़कें बनाई और स्कूल खोले गए। उन्होंने कहा कि नक्सलियों की मांद में जाकर उन्हें चुनौती दी गई और अब आत्मसमर्पण से लड़ाई जल्द खात्मे की ओर बढ़ेगी।
कांग्रेस के लिए बड़े नुकसान की याद
भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने नक्सलवाद के कारण दशकों तक त्रासदी झेली, जिसमें जवानों, आदिवासियों और कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को खोना शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में डेढ़ दशक तक भाजपा की सरकार माओवाद के खिलाफ लड़ाई में इच्छाशून्य रही, जिसका खुलासा सुरक्षा सलाहकार केपीएस गिल ने भी किया था।
नक्सलवाद को लिया गया राष्ट्रीय स्तर की चुनौती के रूप में
भूपेश बघेल ने बताया कि उनकी सरकार के आने के बाद नक्सल उन्मूलन नीति को गंभीरता से लागू किया गया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का सहयोग इस लड़ाई में महत्वपूर्ण रहा और इसे देश की साझा चुनौती के रूप में लिया गया।
सरकार और सुरक्षा बलों को बधाई
भूपेश बघेल ने कहा कि बस्तर में बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण से संतोष है। उन्होंने कहा, “हम सब मिलकर जीतेंगे। सरकार और सुरक्षाबलों को बधाई। झीरम शहीद अमर रहें, संविधान ज़िंदाबाद।”
मंत्री केदार कश्यप ने जताया आभार और उठाए सवाल
सरकार की तारीफ करने के लिए मंत्री केदार कश्यप ने भूपेश बघेल का धन्यवाद किया। उन्होंने PCC चीफ दीपक बैज की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह व्यक्तिगत राय है या कांग्रेस का आधिकारिक बयान। उन्होंने झीरम मामले में राहुल गांधी द्वारा नक्सलियों को क्लीन चिट देने पर भी आलोचना की और कहा कि आंतरिक सुरक्षा के मामलों पर दोहरी राजनीति से बचना चाहिए।
