35 साल सेवा देने के बाद हुआ नुकसान… अब सरकार सुधारेगी वो ‘एक गलती’, जानें किसे मिलेगा फायदा!

भोपाल। शासकीय सेवा में अपने जीवन के साढ़े तीन दशक खपाने के बाद 30 जून को सेवानिवृत्त हुए मध्य प्रदेश के करीब 20 हजार कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। पदोन्नति की अंतिम सूची में नाम शामिल न होने या विभागीय देरी की वजह से जो कर्मचारी बिना प्रमोशन के रिटायर हो गए थे और पेंशन में आर्थिक नुकसान उठा रहे थे, सरकार अब उन्हें ‘प्रोफार्मा प्रमोशन’ का लाभ देने जा रही है।

मंत्रालय स्तर पर इस बड़ी गलती को सुधारने के लिए प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कर्मचारियों के इन प्रकरणों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसके बाद शासन ने आगामी विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) के माध्यम से पात्र पेंशनरों की सूची तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

काल्पनिक वेतन निर्धारण और पेंशन में बढ़ोत्तरी

प्रोफार्मा प्रमोशन के तहत रिटायर हो चुके कर्मचारियों को पदोन्नत पद का वास्तविक कार्यभार तो नहीं दिया जाएगा लेकिन उनके उच्च पद के आधार पर एक काल्पनिक वेतन तय किया जाएगा। इसी तय किए गए काल्पनिक वेतनमान के आधार पर कर्मचारियों की मासिक पेंशन का पुननिर्धारण होगा, जिससे उनकी पेंशन में सम्मानजनक इजाफा होगा। हालांकि इस व्यवस्था से कर्मचारियों की बढ़ी हुई पेंशन तो चालू हो जाएगी, लेकिन उन्हें पिछले समय का बकाया एरियर नहीं दिया जाएगा।

2026-27 की DPC से तय होगी पात्रता

राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, वर्ष 2026-27 की विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) में वर्ष 2024-25 की स्थिति और 2020-21 के रिक्त पदों को आधार मानकर कर्मचारियों की पात्रता तय की जाएगी। 35-36 साल की लंबी और निष्ठावान सेवा के बावजूद पदोन्नति के हक से वंचित रहे इन पेंशनरों के लिए सरकार का यह निर्णय एक बड़ा न्याय माना जा रहा है।

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