माओवादियों का अंत नजदीक: हिड़मा एनकाउंटर के बाद 37 का आत्मसमर्पण, लेकिन सेंट्रल मिलिट्री कमीशन ने जारी रखा युद्ध का ऐलान

रायपुर। केंद्र सरकार द्वारा माओवाद को 31 मार्च 2026 तक समाप्त करने की अंतिम समयसीमा नजदीक आते ही नक्सली संगठन में हलचल तेज हो गई है। हाल ही में नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा की एनकाउंटर में मौत के बाद तेलंगाना में 37 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी) बटालियन नंबर 1 के लड़ाके भी शामिल हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के बचे-खुचे नक्सलियों ने भी सरकार से आत्मसमर्पण के लिए समय मांगा है। दूसरी ओर, माओवादियों के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) ने एक पत्र जारी कर युद्ध जारी रखने का ऐलान किया है, जिसमें पिछले एक साल के भारी नुकसान का जिक्र है। पत्र में दावा किया गया कि देशभर में 320 नक्सली कमांडर मारे गए, जिनमें से 243 छत्तीसगढ़ में ही थे, जबकि नक्सली हमलों में करीब 100 जवान शहीद हुए।

 

#### हिड़मा की मौत के बाद तेलंगाना में 37 नक्सलियों का आत्मसमर्पण

18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में हुई एनकाउंटर में माड़वी हिड़मा सहित 6 शीर्ष नक्सली मारे गए। हिड़मा, जो पीएलजीए बटालियन नंबर 1 का कमांडर था, पर 1 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम था। वह दंतेवाड़ा नरसंहार (2010, 76 जवान शहीद), झीरम घाटी हमला (2013, 27 मौतें) और सुकमा-बीजापुर हमला (2021, 22 जवान शहीद) जैसे कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड था। इस घटना के चार दिन बाद, 22 नवंबर को तेलंगाना में 37 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें 2 चेंद्रन्ना और प्रभात जैसे सेंट्रल कमेटी सदस्य, 3 डिविजनल कमेटी सदस्य, 9 एरिया कमेटी सदस्य और 22 दलम (दल) सदस्य शामिल थे। 35 समर्पित नक्सली छत्तीसगढ़ के निवासी थे। तेलंगाना पुलिस ने इन्हें 1.40 करोड़ रुपये का इनाम दिया।

 

तेलंगाना डीजीपी बी. शिवदर रेड्डी ने बताया कि जनवरी 2025 से अब तक 465 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें 2 सेंट्रल कमेटी और 11 स्टेट कमेटी सदस्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री के 21 अक्टूबर के आह्वान पर कई नक्सली हथियार डाल रहे हैं। रिहैबिलिटेशन पॉलिसी के तहत इन्हें मुख्यधारा में लाया जाएगा।

 

अन्य राज्यों में आत्मसमर्पण की होड़, समय मांग रहे बचे नक्सली

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में बचे नक्सलियों ने भी सरकार से आत्मसमर्पण के लिए समय मांगा है। छत्तीसगढ़ में अप्रैल 2025 में शुरू हुई ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ (ऑपरेशन कागर) ने नक्सली मुख्यालयों को नष्ट कर दिया, जिसमें 31 नक्सली मारे गए। इसके बाद सैकड़ों ने हथियार डाले। जुलाई 2025 में छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा में दर्जनों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में अक्टूबर 2025 में 60 से अधिक ने सरेंडर किया, जिसमें पोलितब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल राव (सोनू) शामिल थे।

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है। छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने हिड़मा की मौत को ‘लाल आतंक पर निर्णायक प्रहार’ बताया। 2025 में अब तक छत्तीसगढ़ में 243 नक्सली मारे गए, जबकि पूरे देश में 300 से अधिक।

सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का पत्र: नुकसान का इकबाल, लेकिन युद्ध जारी

माओवादियों के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन ने एक पत्र जारी कर पिछले साल के नुकसान का जिक्र किया। इसमें दावा किया गया कि 2024-25 में देशभर में 320 नक्सली कमांडर मारे गए, जिनमें 243 छत्तीसगढ़ में। नक्सली हमलों में 100 जवान शहीद हुए। पत्र में पीएलजीए के 25 साल पूरे होने पर 2 से 8 दिसंबर तक विशेष सप्ताह मनाने का ऐलान किया गया। सीपीआई (माओइस्ट) ने लोगों से सेमिनार, मीटिंग और रैलियां आयोजित करने को कहा।

 

हालांकि, एमसी जोन (माओइस्ट कम्युनिस्ट जोन?) के प्रवक्ता अनंत ने कहा कि इस बार पीएलजीए सप्ताह नहीं मनाएंगे और पुलिस पर कोई हमला नहीं करेंगे। केंद्रीय कमेटी ने नुकसान के बावजूद ‘लंबे लोगों के युद्ध’ को जारी रखने का संकल्प लिया। अप्रैल 2025 में जारी एक अन्य पत्र में माओवादियों ने शांति वार्ता की पेशकश की, लेकिन ‘उपयुक्त माहौल’ बनाने की शर्त रखी।

 

नक्सलवाद का पतन: 2025 में 1300 से अधिक सरेंडर, रेड कॉरिडोर सिकुड़ गया

2025 में नक्सल प्रभावित क्षेत्र 180 जिलों से घटकर 12 रह गए। 2015 से 2025 तक 10,000 से अधिक नक्सली सरेंडर कर चुके। छत्तीसगढ़ में 50 नए फॉरवर्ड कैंप और 2,000 ‘बस्तर फाइटर्स’ ने पीएलजीए की गतिविधियां सीमित कर दीं। ऑपरेशन कागर ने मई 2025 में बसवराजू को मार गिराया।

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