बस्तर दशहरा के कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कहा- मार्च 2026 तक माओवाद को खत्म कर देंगे
जगदलपुर में इस बार का बस्तर दशहरा बेहद खास बन गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जगदलपुर पहुंचे और मां दंतेश्वरी के दर्शन के बाद मुरिया दरबार में शामिल हुए। यहां उन्होंने मांझी, चालकी, गायता और पहाड़ी परिषद के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद किया। शाह ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना का शुभारंभ भी किया, जिससे बस्तर के 250 गांव मुख्य शहरों से जुड़ सकेंगे।
माओवादियों को सख्त चेतावनी
गृहमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि माओवादी मुख्यधारा से जुड़ें, अन्यथा सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार माओवादियों के लिए पुनर्वास योजना चला रही है, लेकिन जो समाज विरोधी गतिविधियों में शामिल रहेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
ऐतिहासिक परंपरा में केंद्रीय गृहमंत्री की पहली मौजूदगी
मुरिया दरबार की यह परंपरा 145 वर्षों से जारी है, लेकिन पहली बार कोई केंद्रीय गृहमंत्री इसमें शामिल हुए। शाह ने बस्तर दशहरे को न सिर्फ प्रदेश या देश, बल्कि पूरी दुनिया के लिए अद्वितीय बताया। उन्होंने कहा कि यहां की परंपराएं और आस्था आदिवासी अस्मिता की सबसे बड़ी पहचान हैं।
बस्तर दौरे का महत्व
बीते 22 महीनों में यह शाह का छठा बस्तर दौरा है। वे पहले ही 30 मार्च 2026 तक माओवाद के खात्मे का लक्ष्य तय कर चुके हैं और हर दौरे में उन्होंने माओवादियों से समर्पण की अपील की है। इस बार का प्रवास इसलिए भी अहम है क्योंकि बस्तर अब माओवाद मुक्त होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।
परंपरा और विद्रोह की जड़ें
बस्तर दशहरे का मुरिया दरबार 1876 के ऐतिहासिक मुरिया विद्रोह से जुड़ा है। अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के खिलाफ इस विद्रोह ने आदिवासी अधिकारों की रक्षा की नींव रखी थी। तब से यह दरबार जनजातीय एकता और स्वाभिमान का प्रतीक बन गया।
शाह का सांस्कृतिक संकल्प
शाह ने पहले भी दंतेवाड़ा में ‘बस्तर पंडुम’ मेले से आदिवासी संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का संकल्प लिया था। जगदलपुर में बस्तर दशहरा का हिस्सा बनकर उन्होंने उसी संकल्प को आगे बढ़ाया है।
