रामपुर जेल में आजम खान से मिले अखिलेश यादव: भावुक होकर बोले- किसी परिवार पर इतना अन्याय नहीं हुआ
रामपुर। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनावी तैयारियों के तहत जमीनी स्तर पर सक्रिय समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव गुरुवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान से मिलने रामपुर जिला जेल पहुंचे। जेल में आजम खान से लंबी बातचीत के बाद बाहर निकले अखिलेश यादव ने उनके प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त की और सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर राजनीतिक हमला बोला।
‘इतना अन्याय किसी राजनीतिक परिवार पर नहीं हुआ’
जेल परिसर से बाहर आकर मीडिया से बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि आजम खान के साथ मेरी काफी लंबी बातचीत हुई है। सच्चाई कभी न कभी तो सामने आएगी ही, और जब वह उजागर होगी तो जिम्मेदार लोगों को समाज, देश और कानून को जवाब देना होगा। रामपुर की भावना और यहां के राम राज्य की मूल भावना को आघात पहुंचाया गया है।
अखिलेश यादव ने भावुक होते हुए कहा कि आजम थे, आजम हैं और आजम रहेंगे। देश में किसी भी परिवार, विशेषकर किसी राजनीतिक परिवार पर इतना बड़ा अन्याय कभी नहीं हुआ होगा, जितना आजम खान साहब और उनके परिजनों पर किया गया है। फर्जी मुकदमे दर्ज करने वाले भ्रष्ट अधिकारी अब खुद उनका साथ छोड़ रहे हैं। आजम खान साहब का जो सपना जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर था, उसे समाजवादी पार्टी हर हाल में पूरा करेगी।
‘2027 में जनता भाजपा का पूरी तरह सफाया कर देगी’
सपा प्रमुख ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी का रोडमैप साफ करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का एकमात्र और सीधा लक्ष्य भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करना है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जमीन पर जुटा हुआ है।
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा नेताओं को यह आभास हो चुका है कि इस बार प्रदेश से उनका पूरी तरह सफाया होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश की जनता न केवल भाजपा को हराएगी, बल्कि उसे राज्य की राजनीति से हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखाएगी। वर्ष 2024 के लोकसभा नतीजों में जनता का मूड साफ दिख चुका है। 2027 के चुनाव में हमारा पूरा ध्यान पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक, सामाजिक न्याय और सच्चाई पर केंद्रित रहेगा।
गौरतलब है कि हाल ही में अखिलेश यादव ने आगामी चुनाव के मद्देनजर सपा का चुनावी घोषणा पत्र जल्द जारी करने के संकेत दिए थे। ऐसे समय में आजम खान से उनकी यह मुलाकात मुस्लिम और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं के बीच एकजुटता का कड़ा संदेश देने की रणनीतिक कोशिश मानी जा रही है।
