हिमाचल में बारिश ने तोड़े सारे रिकॉर्ड: भारी वर्षा, भूस्खलन और बाढ़ से 417 मौतें

शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस साल का मानसून अभूतपूर्व तबाही मचा रहा है। जून से लगातार हो रही भारी बारिश ने न सिर्फ सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए, बल्कि राज्य को गहरे संकट में डाल दिया है। औसत वर्षा 1010.9 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो सामान्य 692.1 मिमी से करीब 46 प्रतिशत अधिक है।

बादल फटना, भूस्खलन और अचानक बाढ़

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, इस मानसून में अब तक बादल फटने की 46 घटनाएं, अचानक बाढ़ की 98 घटनाएं और 145 भूस्खलन दर्ज किए गए हैं। इन आपदाओं ने पहाड़ी इलाकों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।

भारी जनहानि और नुकसान

20 जून से अब तक राज्य में 417 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 231 लोग बारिश से जुड़ी घटनाओं में जबकि 181 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए। करीब 477 लोग घायल हुए हैं और 45 लोग अब भी लापता हैं। 1,500 से अधिक परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।

ढांचागत क्षति और आर्थिक हानि

लगातार आपदाओं से राज्य को अब तक 4,582 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। 1,502 घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं जबकि 6,503 को आंशिक क्षति पहुंची है। मंगलवार शाम तक तीन राष्ट्रीय राजमार्गों समेत 655 सड़कें बंद थीं। 924 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हो गए और 243 जलापूर्ति योजनाएं बाधित हैं, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।

अनिश्चितता में पहाड़ी राज्य

लगातार बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने पूरे हिमाचल में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन से मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित निर्माण कार्य इस बढ़ते संकट के बड़े कारण हैं।

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