Mid Day Meal News: मिड-डे मील पर नया आदेश, अब पहले शिक्षक चखेंगे भोजन, फिर बच्चे करेंगे सेवन
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Mid Day Meal News: छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी स्कूलों और छात्रावासों में मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब बच्चों को परोसे जाने से पहले हर दिन शिक्षक या वार्डन स्वयं भोजन चखेंगे और उसकी गुणवत्ता की पुष्टि करेंगे। इस फैसले का मकसद बच्चों की सेहत और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।
नया नियम क्या कहता है
राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार अब हर स्कूल और छात्रावास में उपस्थिति रजिस्टर के साथ एक नया ‘चखने का रजिस्टर’ अनिवार्य होगा। इस रजिस्टर में रोज़ाना दर्ज किया जाएगा कि भोजन परोसने से पहले किस शिक्षक या वार्डन ने भोजन चखा और अपनी स्वीकृति दी।
क्यों उठाया गया यह कदम
हाल ही में कई स्कूलों से मिड-डे मील की गुणवत्ता पर गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। सबसे बड़ा मामला सुकमा जिले के छिंदगढ़ के पाकेला आवासीय पोटा केबिन का है, जहां 426 बच्चों के लिए तैयार सब्जी में फिनाइल मिला पाया गया। यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा और अदालत ने सरकार को सख्त निर्देश दिए कि मध्यान्ह भोजन में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद ही सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए यह नया नियम लागू करने का निर्णय लिया।
जवाबदेही और निगरानी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मिड-डे मील में किसी भी तरह की गड़बड़ी या लापरवाही पाए जाने पर स्कूल के प्रधानाध्यापक, प्राचार्य या छात्रावास वार्डन को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक जिले में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी, जो पूरे प्रबंधन की निगरानी करेगा और नियमित रिपोर्ट तैयार करेगा।
इसके साथ ही संभावित फूड पॉइजनिंग की स्थितियों से निपटने के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि इस सख्त कदम से बच्चों की सुरक्षा और भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।
