छत्तीसगढ़ के 11 बड़े बांध खतरे की जद में, कई बांधों में दरार और रिसाव, दो पहले ही फूट चुके

छत्तीसगढ़ के 11 बड़े बांध

छत्तीसगढ़ के 11 बड़े बांध

रायपुर: इस साल छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश के चलते बड़े बांध और जलाशय भरकर ओवरफ्लो होने लगे हैं। जहां एक ओर इससे जल संसाधनों में वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी ओर बांधों के टूटने का खतरा भी तेजी से बढ़ गया है। हाल ही में बलरामपुर जिले के लुत्ती और सरगुजा के लुंड्रा स्थित गेरसा बांध टूट चुके हैं। बलरामपुर का ही सकेतवा बांध भी टूटने के कगार पर है।

अब चिंता की बात यह है कि राज्य में 11 और बड़े बांध ऐसे हैं, जिन्हें मध्यम से उच्च खतरे की श्रेणी में रखा गया है। यह जानकारी जल संसाधन विभाग द्वारा तैयार बांध सुरक्षा की हेल्थ रिपोर्ट से सामने आई है।

बांधों की तीन श्रेणियां

जल संसाधन विभाग ने राज्य के सभी बांधों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया है:

श्रेणी 1: अत्यधिक उच्च जोखिम – फिलहाल राज्य में इस श्रेणी में कोई बांध नहीं है।

श्रेणी 2: मध्यम से उच्च जोखिम – जिनमें प्रमुख तकनीकी कमियां हैं और तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। इसमें 11 बांध शामिल हैं।

श्रेणी 3: कम जोखिम – मामूली सुधार से सुरक्षित बनाए जा सकते हैं।

ये हैं खतरे में पड़े 11 प्रमुख बांध

2024-25 के दौरान मानसून से पहले और बाद में किए गए निरीक्षण के आधार पर जिन बांधों को श्रेणी 2 में रखा गया है, वे इस प्रकार हैं: मिनीमाता (हसदेव बांगो) बांध, पंडित रविशंकर सागर (गंगरेल) बांध, पेंड्रावन बांध, आमाबेड़ा बांध, केदारनाला बांध, सिकासार बांध, अमाहगांव बांध, बृजेश्वर सागर (कोईनारी) बांध, कुर्रिडीह बांध, फरसपाल बांध, गौरी बांध जल संसाधन विभाग ने इन सभी बांधों की सुरक्षा के लिए मरम्मत और रोकथाम के उपाय शुरू कर दिए हैं।

किस बांध पर किस तरह का खतरा?

मिनिमाता (बांगो) बांध: क्षैतिज दरारें, जिनसे पानी का रिसाव हो रहा है।

गंगरेल (रविशंकर सागर) बांध: पानी का असामान्य रिसाव और डिस्चार्ज की गंभीर स्थिति।

पेंड्रावन: डाउनस्ट्रीम इलाका लगातार गीला रहता है, जिससे सुरक्षा खतरे में।

आमाबेड़ा: स्पिल चैनल में लगभग 40 मीटर गहरा कटाव, साइफन संरचना 2014 से क्षतिग्रस्त।

केदारनाला: बांध के शीर्ष व स्लूस गेट के पास असामान्य रिसाव।

सिकासार: पिछले छह वर्षों से डाउनस्ट्रीम पर लगातार रिसाव।

अमाहगांव: किसानों द्वारा अनियंत्रित रूप से स्लूस गेट खोलने से नहर में कटाव; हेडवाल तक क्षति।

कोईनारी बांध: मिट्टी का धंसाव, आउटलेट संरचना पर असर।

कुर्रिडीह: स्लूस गेट बंद होने के बावजूद नहर में जल प्रवाह जारी।

फरसपाल: पैरेंट नाला में अनियमित जल प्रवाह देखा गया।

गौरी बांध: बोल्डर के चारों ओर मिट्टी बहने से रिसाव मार्ग बन गया है।

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