छात्रावास का हाल: पौष्टिक भोजन के नाम पर परोसा नमक-चावल! ऐसे होगा बच्चों का विकास ?
सुकमा। बस्तर संभाग के सुकमा जिले से एक बार फिर छात्रावासों में बच्चों के भोजन से जुड़ी लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। कुछ ही दिनों पहले बच्चों के खाने में फिनाइल मिलने से हड़कंप मच गया था और अब मानकापाल स्थित बालक आश्रम में छात्रों को केवल नमक और चावल परोसने की शिकायत उजागर हुई है। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे जिले में आक्रोश और चिंता की लहर पैदा कर दी है।
शिकायत पर तुरंत जांच
मामले की शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देश पर सहायक आयुक्त हेमंत सिन्हा और मंडल संयोजक मौके पर पहुंचे और जांच की। जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि बच्चों को उचित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था, बल्कि उन्हें केवल नमक और चावल परोसा जा रहा था।
अधीक्षक पर गिरी गाज
जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाने पर प्रभारी अधीक्षक जय प्रकाश बघेल को दोषी माना गया। उन पर सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 का उल्लंघन और अपने पदीय कर्तव्यों में घोर लापरवाही का आरोप सिद्ध हुआ। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सुकमा में रहेगा। साथ ही, उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता दी जाएगी।
मासूमों को नहीं मिल रहा भरपेट खाना
बच्चों को पौष्टिक भोजन देने का दावा करने वाली सरकार के आश्रमों में हालात इतने खराब हैं कि मासूमों को भरपेट खाना तक नहीं मिल रहा। शिकायत पर प्रशासन हर बार जांच और निलंबन की कार्रवाई करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल देता है, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।
इस बार जांच में प्रभारी अधीक्षक जय प्रकाश बघेल दोषी पाए गए और उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच बिठाई गई। लेकिन यह कार्रवाई भी केवल एक औपचारिकता लगती है, क्योंकि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी केवल निचले स्तर तक सीमित कर दी जाती है। सवाल यह है कि बच्चों के हक़ का राशन आखिर कहां गायब हो रहा है और इसकी निगरानी करने वाले अधिकारी क्यों चुप हैं?
बार-बार लापरवाही पर उठ रहे सवाल
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने बयान जारी कर कहा है कि बच्चों के भोजन, स्वास्थ्य और देखभाल में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि सरकारी छात्रावासों और आश्रमों में बच्चों की थाली से पोषण लगातार गायब है और सिस्टम आंख मूंदे बैठा है।
गौरतलब है कि हाल ही में बस्तर के ही एक अन्य छात्रावास में बच्चों के खाने में फिनाइल मिलने की घटना ने प्रदेशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। उसके बाद यह ताज़ा मामला सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर सवाल उठने लगे हैं।
