नियमितीकरण की मांग पर अड़े NHM कर्मचारी, खून से लिखे प्रधानमंत्री को खत
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारी 15 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। नियमितीकरण समेत 10 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब भावनात्मक रूप ले चुका है। सोमवार को कर्मचारियों ने अपने खून से 100 पत्र लिखकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और राज्यपाल को भेजे हैं।
सरकार तक पीड़ा पहुंचाने की अनोखी पहल
एनएचएम कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने यह कदम मजबूरी में उठाया है ताकि सरकार उनकी आवाज़ सुने। उनका आरोप है कि कई सालों से वे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक ध्यान नहीं दिया।
सबसे बड़ी मांग नियमितीकरण की है। कर्मचारियों का कहना है कि यह मुद्दा सरकार के घोषणा पत्र में भी शामिल था, लेकिन अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
असुरक्षित भविष्य और संकटग्रस्त परिवार
हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि स्थायी नियुक्ति न होने से उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है। कई परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों ने कहा कि असुरक्षा की स्थिति में लगातार काम करना मुश्किल है, इसलिए जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, हड़ताल जारी रहेगी।
विरोध को मिला भावनात्मक रंग
खून से लिखे गए पत्रों ने इस आंदोलन को और भावनात्मक बना दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार अगर अब भी उनकी मांगों को नजरअंदाज करती है, तो वे और भी कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।
लगातार बढ़ता टकराव
इधर, प्रबंधन ने हड़ताली कर्मचारियों को काम पर लौटने के लिए अल्टीमेटम दे रखा है, वरना सेवा समाप्त करने की चेतावनी दी गई है। ऐसे में टकराव और गहराने की आशंका है। स्वास्थ्य सेवाएं पहले से प्रभावित हैं, और अगर समाधान जल्द नहीं निकला तो आम जनता की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
