राजधानी में फेल हुआ “नो हेलमेट, नो पेट्रोल” अभियान, पहले ही दिन उड़ गईं नियमों की धज्जियां

रायपुर। सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ी पहल की बात करने वाला “नो हेलमेट, नो पेट्रोल” अभियान अपने पहले ही दिन फेल साबित हुआ। रायपुर पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने 1 सितंबर से यह अभियान शुरू करने की घोषणा की थी। इसके लिए बाकायदा उप मुख्यमंत्री अरुण साव और कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह को ज्ञापन भी सौंपा गया था। लेकिन जब अमल की बारी आई, तो शहर के पेट्रोल पंपों पर न तो कोई बोर्ड दिखा, न कोई सख्ती, और न ही प्रशासनिक निगरानी।

पड़ताल में सामने आई सच्चाई

नईदुनिया की टीम ने शुक्रवार को शहर के बड़े पेट्रोल पंपों – फाफाडीह, पचेपेड़ी नाका, जय स्तंभ चौक और शास्त्री चौक – का दौरा किया। सुबह से लेकर देर शाम तक बिना हेलमेट वालों को आराम से पेट्रोल दिया जाता रहा।

सुबह 8 बजे से ही पंपों पर बिना हेलमेट दोपहिया चालकों की लंबी कतारें लगी थीं। पंप स्टाफ से जब पूछा गया तो जवाब मिला – “हमें कोई आदेश नहीं मिला है। बोर्ड लगाने की भी कोई जानकारी नहीं है।”

दोपहर में कई स्कूली छात्र और युवा बिना हेलमेट पेट्रोल भरवाते दिखे। एक कर्मचारी ने साफ कहा – “आपसे ही पहली बार सुन रहे हैं कि ऐसा कोई अभियान शुरू हुआ है।”

शाम 6 बजे के बाद भीड़ और बढ़ी। हेलमेट न पहनने वालों को भी आराम से पेट्रोल दिया गया। जब सवाल किया गया तो स्टाफ का जवाब था – “कोई लिखित आदेश नहीं आया है। हम रोज़ की तरह पेट्रोल दे रहे हैं।”

रात 8 बजे तक भी पंप पर न कोई सूचना बोर्ड दिखा और न ही किसी को रोका गया। एक कर्मचारी ने हंसते हुए कहा – “हेलमेट नहीं तो पेट्रोल नहीं… ऐसा तो हमने बस अखबारों में पढ़ा है।”

CG News: 'नो हेलमेट, नो पेट्रोल' अभियान पहले दिन ही फेल! बिना Helmet धड़ल्ले से मिला Petrol

घोषणा पर सवाल

पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने दावा किया था कि यह अभियान सामाजिक हित में है और सड़क हादसों को रोकने में मदद करेगा। लेकिन जब न तो एसोसिएशन की तरफ से गंभीरता दिखाई दी और न ही प्रशासनिक स्तर पर निगरानी, तो पूरा अभियान हवा-हवाई साबित हो गया।

प्रशासन की चुप्पी

सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की चुप्पी को लेकर है। अभियान की घोषणा सार्वजनिक रूप से हुई थी, इसके बावजूद न कोई मुआयना टीम पहुंची और न ही कोई जांच हुई। बिना निगरानी और आदेश के पंप कर्मचारी अपने पुराने ढर्रे पर चलते रहे।

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