RSS Marks 100 Years: मोहन भागवत बोले – अब भारत को दुनिया में योगदान देने का समय आ गया है
RSS Marks 100 Years
RSS Marks 100 Years: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ की वास्तविक सार्थकता भारत के विश्व गुरु बनने में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को दुनिया में योगदान देना है और अब वह समय आ गया है।
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि “हिंदू राष्ट्र” का अर्थ सत्ता से जुड़ा नहीं है। उनका कहना था कि जब हम हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं तो इसका मतलब यह नहीं होता कि किसी को बाहर किया जा रहा है या किसी का विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र का मतलब सबके लिए समान न्याय और समान अधिकार है, चाहे वह किसी भी धर्म, संप्रदाय या भाषा से जुड़े हों।
भागवत ने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने दो बार बड़ी गुलामियों का सामना किया है। 1857 के बाद भारतीय असंतोष को सही दिशा देने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ लोगों ने इसे अपने हित में मोड़ लिया और यह स्वतंत्रता संग्राम का आधार बन गया। कांग्रेस के जरिए कई राजनीतिक धाराएं और दल निकले, जिन्होंने आजादी के आंदोलन में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि अगर आजादी के बाद उस धारा को सही दिशा मिली होती, तो आज भारत की तस्वीर कुछ और होती।
आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक तीसरी धारा भी थी, जिसने समाज को अपने मूल पर लौटने का आह्वान किया। इस धारा के प्रमुख उदाहरण स्वामी दयानंद सरस्वती और स्वामी विवेकानंद थे। संघ आज भी पूरे देश में समाज को संगठित करने का काम कर रहा है और कई धुर-विरोधी भी आज समर्थक बन चुके हैं।
भागवत ने कहा कि विविधता में एकता भारत की असली ताकत है। उन्होंने समझाया कि यदि किसी परीक्षा में कठिन और आसान प्रश्न हों तो पहले आसान प्रश्न चुनना चाहिए। इसी तरह, पहले उन लोगों का जीवन सुधारना होगा जो खुद को हिंदू मानते हैं। जब उनका जीवन आदर्श बनेगा, तो वे लोग भी प्रेरित होंगे जो खुद को हिंदू कहने से कतराते हैं। यही संघ का लक्ष्य है कि संपूर्ण हिंदू समाज का संगठन हो।
