30 दिन जेल में और पद से बर्खास्त! हेमंत सोरेन ने विधेयक को बताया तानाशाही कदम

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर देशभर में सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों को जेल जाने की स्थिति में पद से हटाने के प्रावधान वाले इस विधेयक पर विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को इस कानून को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा और कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने वाला है।

क्या है 130वां संविधान संशोधन विधेयक?

इस विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री किसी गंभीर आरोप में गिरफ्तार होकर 30 दिन तक जेल में रहता है और ज़मानत नहीं मिलती है, तो उसे उसके पद से स्वतः मुक्त कर दिया जाएगा।
केंद्र सरकार का दावा है कि यह प्रावधान भ्रष्टाचार और आपराधिक राजनीति पर लगाम लगाने के लिए है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को कमजोर करने और उन्हें सत्ता से बाहर करने के लिए किया जाएगा।

हेमंत सोरेन का हमला

सोरेन ने कहा कि बीजेपी नीत केंद्र सरकार देश को ‘‘कमजोर और विभाजित’’ करने वाले कदम उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास और मजबूती की बातें सिर्फ राजनीतिक भाषणों में सुनाई देती हैं, जबकि जमीन पर हकीकत कुछ और है।
उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को भी निशाने पर लिया और कहा कि जनता को समझना चाहिए कि यह प्रक्रिया किस तरह के बदलाव लाने वाली है।

INDIA गठबंधन का विरोध प्रदर्शन

सोमवार को झारखंड विधानसभा के बाहर जेएमएम, कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेताओं ने 130वें संविधान संशोधन विधेयक और बिहार में चल रहे SIR के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्षी दलों का कहना है कि यह विधेयक सिर्फ राजनीतिक हथियार है, जिसके जरिए जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को झूठे मामलों में फंसाकर हटाया जा सकता है

राहुल गांधी की यात्रा पर बयान

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की सराहना करते हुए सोरेन ने कहा कि जनता को केंद्र सरकार के कुकृत्यों से अवगत कराना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, “हम जनता द्वारा चुने गए हैं, इसलिए उन्हीं के पास जाना ही सबसे सही रास्ता है। जनता की अदालत देश की सबसे बड़ी अदालत है।”
सोरेन का यह बयान साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में झारखंड समेत कई राज्यों में केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव और तेज हो सकता है

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