Coma Experience: कोमा से जागे लोगों ने बताई आपबीती, किसी ने देखी दलाई लामा-मदर टेरेसा से मुलाकात तो किसी ने सुनी नर्सों की बातें
Coma Experience
Coma Experience: कोमा (Coma) एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति गहरी बेहोशी में चला जाता है और उसे जगाया नहीं जा सकता। यह अवस्था कुछ दिनों से लेकर महीनों तक रह सकती है। हाल ही में डेली मेल की एक रिपोर्ट में उन लोगों के अनुभव सामने आए हैं, जो कोमा से बाहर आए। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर बताया कि कोमा में रहते हुए उन्होंने अजीब, डरावने और कभी-कभी अवास्तविक अनुभव किए।
चीखना चाहा, पर आवाज नहीं निकल सकी
एक शख्स ने लिखा कि वह कोमा में चीखना चाहता था, लेकिन उसकी आवाज बाहर नहीं निकल पा रही थी। उसे नर्सों और परिजनों की बातें सुनाई देती थीं, मगर वह किसी तरह से जवाब नहीं दे पा रहा था।
दलाई लामा और मदर टेरेसा से ‘मुलाकात’
चार हफ्ते तक कोमा में रहे एक यूजर ने दावा किया कि इस दौरान उन्होंने अलग-अलग जगहों की यात्रा की। उन्हें लगा जैसे वे दलाई लामा और मदर टेरेसा से मिले हों। कभी वे विमान दुर्घटना में घायल हुए, तो कभी उन्हें ऐसा महसूस हुआ मानो वे अंतरिक्ष में फेंक दिए गए हों।
पति की हत्या का डरावना सपना
एक महिला ने बताया कि कोमा के दौरान उन्होंने सपना देखा कि उनके पति की हत्या हो गई है। जब वे होश में आईं, तब तक बोलने में असमर्थ थीं। उन्हें लगा कि जो उन्होंने देखा वह सच है। जब पति उनसे मिलने आए तो उन्हें लगा जैसे उनका भूत सामने खड़ा है।
प्रियजनों और नर्सों की आवाजें सुनाई दीं
कई लोगों ने दावा किया कि कोमा में रहते हुए वे आसपास हो रही बातें सुन सकते थे। किसी ने नर्सों की चर्चा सुनी, तो किसी ने परिवार की प्रार्थनाओं की आवाजें। लेकिन वे चाहकर भी जवाब नहीं दे सके।
अलग ही जिंदगी का अनुभव
एक महिला ने बताया कि कोमा के दौरान उन्होंने खुद को एक कैरिबियाई द्वीप पर पाया और वहां अजनबी लोगों से मिलीं। एक अन्य व्यक्ति ने लिखा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे वे सामान्य जिंदगी जी रहे हों, उन्हें बिल्कुल अहसास नहीं था कि वे कोमा में हैं।
NHS की परिभाषा में कोमा
ब्रिटेन की हेल्थ सर्विस NHS के अनुसार, कोमा ऐसी गहरी बेहोशी की स्थिति है जिसमें मस्तिष्क की गतिविधि बहुत कम हो जाती है। व्यक्ति सांस लेने या निगलने जैसी क्रियाएं बिना सहायता के नहीं कर पाता। कोमा कुछ दिनों से लेकर महीनों या सालों तक भी रह सकता है। कुछ मरीज धीरे-धीरे ठीक हो जाते हैं, जबकि कई कभी होश में नहीं आते।
