समाधान शिविर में अफसर की लापरवाही पर भड़के विधायक, बोले – जब जनप्रतिनिधियों की नहीं सुन रहे तो जनता की कौन सुनेगा?

महासमुंद। छत्तीसगढ़ में सुशासन को ज़मीन पर उतारने के लिए चल रहे ‘सुशासन तिहार 2025’ के तहत महासमुंद जिले के ग्राम बेमचा में समाधान शिविर का आयोजन किया गया। लेकिन यह शिविर लोगों की समस्याओं का समाधान करने की बजाय प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही की कमी का एक उदाहरण बनकर रह गया।

विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, जो शिविर में बतौर अतिथि पहुंचे थे, उन्होंने शिविर स्थल पर लगे विभिन्न विभागों के स्टॉल का निरीक्षण किया। लेकिन जब वे महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टॉल पर पहुंचे, तो वहाँ की अनियमितताओं को देखकर नाराज़ हो गए। अधिकारी समीर पाण्डेय को लापरवाही पर फटकार लगाते हुए विधायक ने कहा कि “जब एक जनप्रतिनिधि की बात अधिकारी नहीं सुन रहा, तो आम जनता की समस्याओं का क्या होगा?”

क्या है मामला?

कुछ माह पूर्व विधायक ने समीर पाण्डेय से मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के तहत लाभार्थियों और आवेदकों की जानकारी मांगी थी। पाण्डेय ने केवल सूची दी, लेकिन आवेदन पत्र नहीं सौंपे। इस बात को लेकर जब विधायक ने मौके पर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह को बुलाया, तो उन्होंने भी अधिकारी को तत्काल आवेदन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। लेकिन तब तक कई ग्रामीण निराश होकर आवेदन दिए बिना ही लौट गए।

आमजन में बढ़ा अविश्वास

शिविर में मौजूद ग्रामीणों ने इस घटनाक्रम को प्रत्यक्ष देखा। कई लोगों ने दबी आवाज में कहा कि “जब विधायक की बात अफसर अनसुनी कर रहे हैं, तो हमारी कौन सुनेगा?” यह नज़ारा सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करता है, जहां मंच तो जनता के लिए सजाया जाता है, लेकिन मूल उद्देश्य – जनसुनवाई – पीछे छूट जाता है।

 

 

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