छत्तीसगढ़ के दो गांवों में पादरियों के प्रवेश पर प्रतिबंध, सीमाओं पर लगे चेतावनी बोर्ड
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र की दो आदिवासी ग्राम पंचायतों – कुडाल और जुनवानी – ने ग्राम सभा प्रस्ताव पारित कर ईसाई धर्म प्रचारकों, पादरियों और पास्टरों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इन गांवों की सीमाओं पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, जिनमें साफ तौर पर लिखा गया है कि धर्मांतरण कराने वाले बाहरी लोगों का गांव में प्रवेश वर्जित है।
धर्मांतरण को लेकर विवाद, फिर प्रतिबंध का फैसला
कुडाल गांव में हाल ही में एक धर्मांतरण कर चुकी महिला के शव के दफनाने को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद गांव की ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि किसी भी ईसाई प्रचारक या पादरी को अब गांव में घुसने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी तरह, जुनवानी ग्राम सभा ने भी पादरियों के प्रवेश, धार्मिक आयोजनों और प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी है।
संविधान के प्रावधानों का हवाला
इन बोर्डों में संविधान की पांचवीं अनुसूची और पीईएसए कानून 1996 का हवाला दिया गया है। इसके अनुसार, ग्राम सभा को अपनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक संरचना की रक्षा का अधिकार है। ग्राम जुनवानी के गायता (धार्मिक प्रमुख) राजेंद्र कोमरा ने कहा कि बाहर से आए धर्म प्रचारक भोले-भाले ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन करा रहे हैं, जिससे आदिवासी संस्कृति पर संकट खड़ा हो गया है।
घर वापसी की शुरुआत
ग्राम कुडाल की दुकली बाई सलाम ने बताया कि बीमारी के चलते उन्होंने चर्च जाना शुरू किया था, लेकिन समाज से कटाव के बाद उन्होंने अपने मूल धर्म में वापसी कर ली। अब गांव में फिर से उन्हें स्वीकार कर लिया गया है। इसी तरह के अनुभव कई अन्य ग्रामीणों ने भी साझा किए हैं।
धर्मांतरण के खिलाफ जनजागृति
बस्तर संभाग में धर्मांतरण के खिलाफ जनजागरण की लहर चल रही है। कई पंचायतें ग्राम सभा के जरिए धर्मांतरण विरोधी प्रस्ताव पारित कर रही हैं। कुछ गांवों ने तो यहां तक फैसला लिया है कि धर्म बदलने वालों के शवों का गांव में दफन भी नहीं किया जाएगा।
धर्म परिवर्तन और सामाजिक विघटन
ग्राम प्रमुखों का कहना है कि धर्मांतरण के चलते सामाजिक एकता, पारंपरिक पूजा-पद्धतियों और आपसी रिश्तों में खटास आ रही है। परिवारों में झगड़े बढ़ गए हैं और समुदाय में दरारें पैदा हो रही हैं।
आंकड़े: 18 ने धर्म बदला, 5 की घर वापसी
गायता राजेंद्र कोमरा के अनुसार, जुनवानी में 8 परिवारों ने ईसाई धर्म अपना लिया था, जिनमें से 3 परिवारों की घर वापसी हो चुकी है। कुडाल गांव में 10 परिवारों ने धर्म बदला था, जिनमें से 2 वापस अपने मूल धर्म में लौटे हैं। बाकी परिवारों को भी समझाने का प्रयास जारी है।
