Rajasthan School Building Collapse: छत गिरने से 6 बच्चों की मौत, मलबे में दबे कई छात्र – देश में फिर उठे स्कूल सुरक्षा पर सवाल
Rajasthan School Building Collapse
झालावाड़ (राजस्थान) | Rajasthan School Building Collapse: राजस्थान के झालावाड़ जिले में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। जिले के मनोहरथाना क्षेत्र स्थित पिपलोदी प्राइमरी स्कूल की छत अचानक ढह गई, जिसमें 6 बच्चों की मौत हो गई और 17 से ज्यादा घायल हो गए। इस हादसे में अभी भी 40 से अधिक बच्चों के मलबे में दबे होने की आशंका है। राहत और बचाव कार्य जारी है, और मौके पर प्रशासन, पुलिस व NDRF की टीमें जुटी हुई हैं।
हादसा कैसे हुआ?
यह भयावह घटना सुबह करीब 8 बजे उस समय हुई जब बच्चे अपनी कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे थे। हादसे के वक्त स्कूल में लगभग 70 छात्र मौजूद थे। छत गिरते ही चीख-पुकार मच गई और चारों ओर अफरा-तफरी फैल गई। जिला कलेक्टर और एसपी मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी शुरू की।
क्या यह पहली बार है?
नहीं, भारत में यह कोई पहला स्कूल हादसा नहीं है। इससे पहले भी देश ने कई दर्दनाक स्कूल त्रासदियों का सामना किया है, जिनमें सैकड़ों मासूम बच्चों की जान गई। हर हादसे के बाद सुरक्षा पर बातें जरूर होती हैं, लेकिन ज़मीनी सुधार अब तक नज़र नहीं आया।
भारत के अब तक के सबसे भयावह स्कूल हादसे
1. डबवाली अग्निकांड (हरियाणा, 1995):
248 बच्चों की मौत, कुल 442 लोग जिंदा जल गए।
डीएवी स्कूल के वार्षिक महोत्सव के दौरान टेंट में आग लग गई, और चारों तरफ मातम छा गया।
2. कुंभकोणम स्कूल अग्निकांड (तमिलनाडु, 2004):
94 बच्चों की मौत
एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में दोपहर के भोजन के दौरान चूल्हे से उठी चिंगारी ने घास की छत को आग पकड़वा दी।
3. पाली स्कूल बस हादसा (राजस्थान, 2024):
2 मौतें, 20 छात्र घायल
स्कूल टूर पर निकली बस ट्रक से टकरा गई। 11 बच्चों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया।
4. वडोदरा स्कूल बिल्डिंग ढहना:
2 बच्चों की मौत
चार मंजिला स्कूल की इमारत का हिस्सा बारिश के कारण गिर गया। घटिया निर्माण सामग्री हादसे की वजह बनी।
5. दिल्ली स्कूल दीवार गिरना:
5 बच्चों की मौत
कन्हैया नगर इलाके में पुरानी इमारत की दीवार गिर गई, रखरखाव की भारी कमी उजागर हुई।
6. भुज भूकंप (गुजरात, 2001):
कई स्कूलों की इमारतें धराशायी हुईं। सैकड़ों स्कूली बच्चों की जान गई, दर्जनों घायल हुए।
हाल ही की कुछ घटनाएं:
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राजसमंद (2025): सैलाब में स्कूल वैन फंसी, सौभाग्य से सभी बच्चे बचा लिए गए।
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दिल्ली और अन्य शहरों में: सुरक्षा ऑडिट और निरीक्षण की भारी कमी सामने आई है।
क्या कहती हैं गाइडलाइंस?
CBSE के मुताबिक:
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स्कूल इमारतें भूकंप-रोधी होनी चाहिए।
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हर छात्र के लिए कम से कम 1 वर्ग मीटर जगह होनी चाहिए।
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स्कूल बसों में ओवरलोडिंग नहीं होनी चाहिए।
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हर स्कूल में फायर ड्रिल, रेस्क्यू प्लान और प्राथमिक चिकित्सा ट्रेनिंग अनिवार्य होनी चाहिए।
झालावाड़ की घटना एक बार फिर हमें यह याद दिलाती है कि स्कूल सिर्फ शिक्षा के केंद्र नहीं, बच्चों की सुरक्षा और जीवन के भी केंद्र हैं। ऐसे हादसों के बाद सिर्फ जांच या मुआवज़ा काफी नहीं — जवाबदेही, प्रणालीगत सुधार और सुरक्षा के लिए सख्त कार्यवाही अब समय की मांग है।
