CG Liquor News: छत्तीसगढ़ विधानसभा में जनविश्वास विधेयक पारित, शराब सेवन और अन्य मामलों में जेल की सजा की जगह अब जुर्माने का प्रावधान

Chhattisgarh Liquor News

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रायपुर | CG Liquor News: छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों और व्यापारियों के लिए राहत की खबर है। राज्य विधानसभा में सोमवार को “जनविश्वास विधेयक” ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक के जरिए 8 प्रमुख अधिनियमों के कुल 163 प्रावधानों में संशोधन किया गया है, जिससे अब कई मामूली अपराधों पर सीधे जेल भेजने की बजाय केवल प्रशासनिक जुर्माना लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य है आम नागरिकों को अनावश्यक कानूनी उलझनों से बचाना और राज्य में कारोबार करने के माहौल को आसान बनाना।

शराब पीने वालों के लिए बदला कानून

विधेयक के सबसे चर्चित बदलावों में से एक है छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम 1915 में किया गया संशोधन। अब यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर पहली बार शराब पीते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे केवल आर्थिक जुर्माना भरना होगा। हालांकि अगर वह दोबारा इसी अपराध को दोहराता है, तो फिर उसके खिलाफ जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा का प्रावधान भी लागू होगा। इस बदलाव से राज्य में शराब पीने वालों के लिए अब कानून में एक बार की “माफ़ी” दी गई है, लेकिन दोहराने पर सख्ती बरती जाएगी।

किराया बढ़ाने और सोसायटी से जुड़े मामलों में राहत

विधेयक में नगरीय प्रशासन विभाग से जुड़े कानूनों में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। उदाहरण के लिए, पहले यदि कोई मकान मालिक किराया बढ़ाने की सूचना नगर निगम को नहीं देता था, तो उस पर आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता था। अब इस नियम में बदलाव कर दिया गया है, और ऐसे मामलों में केवल अधिकतम ₹1000 का जुर्माना देना होगा।

इसी तरह सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत वार्षिक प्रतिवेदन दाखिल करने में देरी होने पर अब आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसकी जगह नाममात्र का आर्थिक दंड लिया जाएगा। खासतौर पर महिला स्व-सहायता समूहों के मामलों में यह जुर्माना और भी कम रखा गया है।

‘सहकारी’ शब्द के इस्तेमाल पर अब नहीं होगी सजा

अक्सर देखा गया है कि कई संस्थाएं अनजाने में अपने नाम के साथ ‘सहकारी’ शब्द जोड़ लेती थीं, जिसके चलते उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता था। अब जनविश्वास विधेयक के जरिए इस पर भी राहत दी गई है। अब यदि कोई संस्था गलती से सहकारी शब्द का उपयोग कर लेती है, तो उस पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलेगा। उसकी जगह केवल प्रशासनिक जुर्माना लिया जाएगा।

सरकार का मकसद – जनता का विश्वास जीतना

राज्य सरकार का कहना है कि यह विधेयक जनता में विश्वास बढ़ाने और कानून व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। छोटे-मोटे मामलों में जेल भेजने की बजाय समझदारी और सुधार का रास्ता अपनाने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि जनता को भयमुक्त माहौल मिले और व्यापार, निवेश, सहकारिता एवं सामाजिक संगठनों को बढ़ावा दिया जा सके।

छत्तीसगढ़ में “जनविश्वास विधेयक” के जरिए कानूनों में किए गए यह संशोधन आम लोगों और व्यापारियों के लिए न सिर्फ राहत देने वाले हैं, बल्कि राज्य प्रशासन के दृष्टिकोण में एक सकारात्मक बदलाव को भी दर्शाते हैं। शराब पीने, किराया बढ़ाने या सोसायटी से जुड़े मामूली मामलों में अब जेल की बजाय आर्थिक दंड से काम चलेगा, जिससे नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास बढ़ेगा और न्याय व्यवस्था भी अधिक संतुलित बन सकेगी।

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