छत्तीसगढ़ के इस जिले में होगी मॉकड्रिल: 1971 के बाद पहली बार देशभर में बड़े स्तर पर अभ्यास

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में 7 मई को युद्ध जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। यह अभ्यास केंद्र सरकार के निर्देश पर देश के 244 जिलों में एक साथ कराया जा रहा है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए यह तैयारी की जा रही है। पहलगाम हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी।

नागरिकों को सिखाई जाएगी युद्धकालीन सुरक्षा

ड्रिल के दौरान दुर्ग जिला प्रशासन आम नागरिकों, छात्रों और कर्मचारियों को युद्ध, हवाई हमले या अन्य आपात परिस्थितियों में खुद को सुरक्षित रखने की ट्रेनिंग देगा। इसके लिए एयर रेड सायरन बजाए जाएंगे, ब्लैकआउट किया जाएगा और रेस्क्यू ऑपरेशन का अभ्यास होगा।

ब्लैकआउट और बंकरों की स्थिति की होगी जांच

एक निश्चित समय पर पूरे क्षेत्र की लाइटें बंद कर ब्लैकआउट एक्सरसाइज की जाएगी ताकि रात में हमले की स्थिति में सुरक्षा उपायों की जांच हो सके। साथ ही पुराने बंकरों की सफाई और उनकी वर्तमान उपयोगिता का भी मूल्यांकन किया जाएगा।

मुख्य उद्देश्य और प्रमुख गतिविधियाँ

इस मॉक ड्रिल का मकसद देश के सिविल डिफेंस सिस्टम की प्रभावशीलता को परखना है। ड्रिल के दौरान निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियाँ की जाएंगी:

  • एयर रेड वार्निंग सिस्टम की जांच
  • इंडियन एयर फोर्स से हॉटलाइन और रेडियो कम्युनिकेशन की टेस्टिंग
  • कंट्रोल रूम और शैडो कंट्रोल रूम की गतिविधियाँ
  • स्कूल-कॉलेजों में सुरक्षात्मक ट्रेनिंग
  • सरकारी भवनों और प्लांट्स को छिपाने की रणनीति
  • फायर ब्रिगेड, वार्डन और रेस्क्यू टीमों की तैनाती
  • नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का अभ्यास
  • स्वयंसेवी सहायता टीमों की तैयारी

1971 के बाद पहली बार इतने बड़े पैमाने पर मॉक ड्रिल

भारत में इस तरह का अभ्यास आखिरी बार 1971 में भारत-पाक युद्ध के समय हुआ था। अब एक बार फिर इतने बड़े पैमाने पर मॉक ड्रिल हो रही है, जो सरकार की सतर्कता और संभावित खतरों से पहले की तैयारी को दर्शाती है।

 

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