रायपुर। Chhattisgarh Vidhan Sabha के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को भारतमाला प्रोजेक्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर सदन में हंगामा देखने को मिला। भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि भारतमाला योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिलासपुर संभाग समेत प्रदेश के कई हिस्सों में जमीन अधिग्रहण के दौरान बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया है।
कौशिक ने लगाए गंभीर आरोप
धरमलाल कौशिक ने कहा कि निजी भूमि अधिग्रहण के मामलों में नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से मुआवजा वितरण किया गया। उन्होंने बताया कि अगर एक एकड़ जमीन का मुआवजा 20 लाख रुपये होता, तो उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर 500 वर्गमीटर से कम दिखा दिया गया, जिससे कुल मुआवजा बढ़कर एक करोड़ रुपये तक पहुंच गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सुनियोजित तरीके से किया गया घोटाला है, जिसमें राजस्व विभाग के अधिकारी, प्रॉपर्टी डीलर और अन्य लोग शामिल हैं।
कौशिक ने कहा कि कई मामलों में सरकारी अभिलेखों में फर्जी नाम दर्ज कर, फर्जी बंटवारा कर और अवैध नामांतरण कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई लोगों के नाम पर ज़मीन दिखाकर उन्हें मुआवजा दिलाया गया, जबकि असल में उनकी जमीन थी ही नहीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च पदस्थ अधिकारी भी इसमें शामिल हैं, जिन्होंने अपने मातहत कर्मचारियों पर दबाव बनाकर इस पूरे षड्यंत्र को अंजाम दिलवाया। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि सभी भूमि अधिग्रहण मामलों की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए, ताकि सच सामने आ सके।
मंत्री टंकराम वर्मा का जवाब
इस पर जवाब देते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि भारतमाला प्रोजेक्ट के अंतर्गत जमीन अधिग्रहण में मुआवजा वितरण से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायतें मिली हैं। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए संभागायुक्तों की अध्यक्षता में जांच दल गठित किए गए हैं और जांच प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में सरकारी और गैर-सरकारी व्यक्तियों की संलिप्तता पाई गई है। इसके बाद प्रकरण को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपा गया है, जो कि राज्य स्तर पर सक्षम एजेंसी है। मंत्री वर्मा ने जानकारी दी कि अब तक की जांच में 8 गैर-सरकारी व्यक्ति और 10 सरकारी कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है।
अब तक की कार्रवाई
अब तक की कार्रवाई में 8 गैर-सरकारी आरोपी, एक सरकारी कर्मचारी और एक सेवानिवृत्त अधिकारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इनमें से 8 आरोपियों के खिलाफ रायपुर स्थित विशेष न्यायालय से स्थायी गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया है। न्यायालय ने 6 आरोपियों के खिलाफ उद्घोषणा भी जारी कर दी है। एक आरोपी को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली हुई है, जबकि एक के विरुद्ध साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया चल रही है।
मंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शने के मूड में नहीं है और सभी संबंधित आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। जांच प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
भारतमाला प्रोजेक्ट से जुड़ी इस कथित अनियमितता ने एक बार फिर से छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल ला दिया है। विपक्ष CBI जांच की मांग कर रहा है तो सरकार इसे राज्य की जांच एजेंसी के माध्यम से निपटाने की बात कह रही है। देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और कितना तूल पकड़ता है।