Congress on Nitin Gadkari: “मोदी के बाद गडकरी?” – कांग्रेस विधायक के बयान से गरमाई सियासत, क्या भाजपा में फूट डालने की रणनीति है ये?
Congress on PM Modi and Nitin Gadkari
Congress on Nitin Gadkari: कांग्रेस के कर्नाटक के विधायक बेलूर गोपालकृष्णा ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने न सिर्फ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान का समर्थन किया, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी को लेकर भी एक चौंकाने वाला सुझाव दे डाला। उनका कहना है कि अगर पीएम मोदी 75 की उम्र पार करने के बाद रिटायर होते हैं, तो अगला प्रधानमंत्री नितिन गडकरी को बनाया जाना चाहिए।
अब सवाल उठता है—क्या यह एक राजनीतिक चाल है? या फिर कांग्रेस को वाकई गडकरी में देश का भविष्य नजर आता है?
क्या कहा कांग्रेस विधायक ने?
सागर विधानसभा से कांग्रेस विधायक बेलूर गोपालकृष्णा ने साफ तौर पर कहा:
“मोहन भागवत जी ने जो बात कही है, वह बिलकुल सही है। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 की उम्र पार कर चुके हैं, तो उन्हें रिटायर हो जाना चाहिए। और भाजपा को नितिन गडकरी जैसे नेता को पीएम पद की जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए, क्योंकि वे जमीनी नेता हैं और गरीबों की चिंता करते हैं।”
उन्होंने ये भी याद दिलाया कि भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को भी 75 साल की उम्र के बाद पार्टी की सक्रिय राजनीति से बाहर कर दिया था, तो अब वही मापदंड प्रधानमंत्री पर क्यों नहीं लागू किया जाना चाहिए?
सियासत के पीछे की रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के पीछे एक नहीं, बल्कि कई राजनीतिक गणनाएं छिपी हो सकती हैं:
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मोदी पर नैतिक दबाव:
भागवत के “75 साल के बाद रिटायरमेंट” वाले बयान को आगे बढ़ाकर कांग्रेस मोदी पर नैतिक दबाव बनाना चाहती है—कहने का मतलब, ‘नियम सबके लिए बराबर क्यों नहीं?’ -
भाजपा में भ्रम पैदा करना:
नितिन गडकरी, जो अक्सर स्वतंत्र सोच और खुलकर बोलने के लिए जाने जाते हैं, पार्टी के भीतर एक अलग छवि रखते हैं। उन्हें आगे बढ़ाकर कांग्रेस शायद भाजपा के नेतृत्व वर्ग में भ्रम या मतभेद पैदा करना चाहती है। -
गडकरी की “सर्वमान्य” छवि:
नितिन गडकरी को एक विकासवादी, तकनीक-प्रेमी और सौम्य नेता के रूप में देखा जाता है। कांग्रेस का यह संदेश हो सकता है कि ‘अगर भाजपा को चलाना ही है, तो गडकरी जैसे नेता से बेहतर कौन?’
भाजपा की प्रतिक्रिया क्या होगी?
भाजपा की ओर से अब तक इस बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने हलचल ज़रूर है। भाजपा की रणनीति अक्सर विपक्ष के “जाल” में फंसे बिना बिना प्रतिक्रिया दिए आगे बढ़ने की होती है, लेकिन इस बार कांग्रेस ने सीधा पार्टी के “नेतृत्व और उत्तराधिकार” को केंद्र में ला दिया है।
बेलूर गोपालकृष्णा का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक शॉट भी माना जा रहा है।
कांग्रेस जानती है कि नरेंद्र मोदी की छवि आज भी भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन अगर कहीं से इस छवि में दरार पड़ती है या आंतरिक सवाल उठते हैं, तो उसे कांग्रेस भविष्य में सियासी लाभ के रूप में देख रही है।
