ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP का बड़ा ऐलान, 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

Gyanesh Kumar

चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा तेज करने का ऐलान किया है। दीपके ने कहा है कि यदि 48 घंटे के भीतर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो CJP देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी।

25 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दीपके ने कहा कि आंदोलन की शुरुआत 2 अक्टूबर को मुंबई से की जाएगी और इसके बाद इसे देश के अलग-अलग शहरों तक ले जाने की योजना है। उन्होंने गांधी जयंती के मौके पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर अभियान चलाने की बात कही।

48 घंटे में इस्तीफे की मांग

इससे एक दिन पहले, 24 सितंबर को CJP की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत कई मांगें रखी गई थीं। अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका ने चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं।

CJP की प्रमुख मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR प्रक्रिया पर रोक और पुरानी मतदाता सूची को बहाल करना शामिल है। संगठन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून में बदलाव की भी मांग रखी है।

SIR को लेकर चुनाव आयोग के अंदर भी सवाल

इस पूरे विवाद को उस रिपोर्ट के बाद और ज्यादा चर्चा मिली, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर असहमति की बात सामने आई थी।

द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी आपत्तियां नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, Form-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मामलों में फैसले उनके संज्ञान के बिना लिए जाने की बात उठाई थी। हालांकि, इन रिपोर्टेड आपत्तियों और उनके अर्थ को लेकर चुनाव आयोग की ओर से भी जवाब सामने आया है, इसलिए इसे आयोग के कामकाज पर चल रहे विवाद के संदर्भ में देखा जा रहा है।

विपक्ष भी उठा रहा है SIR का मुद्दा

SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल पहले से ही सवाल उठाते रहे हैं। हालिया रिपोर्ट के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हुई है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए हैं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चर्चा की मांग की है।

वहीं, चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों का विषय भी अब सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद का एक अहम पहलू यह है कि तीन सदस्यीय आयोग में निर्णय प्रक्रिया और मतदाता डेटा के प्रबंधन को लेकर दो चुनाव आयुक्तों ने अपनी चिंताएं दर्ज कराई थीं।

CJP ने आंदोलन का ऐलान क्यों किया?

अभिजीत दीपके ने अपने ताजा ऐलान में कहा है कि यदि उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं होती है तो 2 अक्टूबर से मुंबई में विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा और इसके बाद इसे देश के दूसरे शहरों तक ले जाने की योजना है।

CJP का यह ऐलान ऐसे समय आया है जब SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक तथा सार्वजनिक बहस तेज है। अब दीपके के ऐलान के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में CJP का प्रस्तावित आंदोलन किस रूप में आगे बढ़ता है और चुनाव आयोग की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है।

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