‘अमेरिका को मुनाफा, भारतीयों पर टैक्स!’ राहुल गांधी ने खोला मोर्चा; बोले- तुरंत वापस लो UPI वाला MDR TAX
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 2,000 रुपये से अधिक के UPI पेमेंट पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानि MDR टैक्स को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। राहुल गांधी ने इस प्रस्तावित टैक्स को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी दबाव के आगे पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं और अमेरिकी कंपनियों को भारत से भारी मुनाफा कमाने का मौका दे दिया है।
‘इंदिरा जी तनकर खड़ी रहती थीं, मोदी ट्रम्प के सामने लेट गए’
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा कि इंदिरा जी से एक बार पूछा गया था कि वे बाएं झुकती हैं या दाएं। तब उन्होंने कहा था मैं तनकर खड़ी रहती हूं। लेकिन मोदी जी का कॉन्सेप्ट ही अलग है, वे न तो लेफ्ट हैं और न ही राइट; उन्होंने सीधे डोनाल्ड ट्रंप के सामने लेट जाने का फैसला किया है। राहुल गांधी ने आगे कहा कि यूपीआई पर टैक्स लगाकर असल में हर भारतीय पर नया बोझ लादा गया है। उन्होंने कहा कि मोदी जी कृपया अमेरिका के सामने लेटना बंद करिए, कुछ हिम्मत दिखाइए, खड़े होइए और इस यूपीआई टैक्स को तुरंत वापस लीजिए।
2000 से ऊपर 0.4% चार्ज: दुकानदार से घूमकर ग्राहक की जेब पर ही आएगा बोझ
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत चार्ज लगाने की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि यह शुल्क आम ग्राहकों को नहीं, बल्कि कंपनियों और व्यापारियों को देना होगा।
इस पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तर्क रखा कि 2,000 रुपए से ऊपर के मर्चेंट लेन-देन भले ही संख्या में केवल 5% हों, लेकिन यूपीआई के कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब 65% हिस्सा इन्हीं के दायरे में आता है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह दावा छलावा है कि ग्राहकों से कोई फीस नहीं ली जाएगी। दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिरकार सामान की कीमतों में जुड़कर आम ग्राहक की जेब से ही निकलेगी।
अमेरिकी दबाव में नीति बदली
अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की ‘जीरो-एमडीआर’ नीति का विरोध कर रही थीं और मोदी सरकार ने उनके दबाव में आकर यह रास्ता खोल दिया। इस पोस्ट को पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने भी साझा किया।
कांग्रेस का गणित: RBI के सरप्लस का महज 7.2% हिस्सा काफी
कांग्रेस ने सरकार के वित्तीय तर्कों को खारिज करते हुए आंकड़े पेश किए। जिसमें उन्होंने बताया कि यूपीआई नेटवर्क को चलाने के लिए सालाना करीब ₹20,700 करोड़ की आवश्यकता बताई जाती है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सरकार को 3 लाख करोड़ रुपये का सरप्लस ट्रांसफर किया है। देश के लिस्टेड बैंकों का मुनाफा 4.11 लाख करोड़ रुपये से ऊपर है और यूपीआई संचालित करने वाली एनपीसीआई (NPCI) का प्री-टैक्स मुनाफा 1,888 करोड़ रुपये रहा है।
कांग्रेस के अनुसार, RBI से सरकार को मिले पैसे के महज 7.2% हिस्से से पूरे यूपीआई नेटवर्क का सालाना खर्च आसानी से निकल सकता है, फिर भी सरकार द्वारा टैक्स थोपना और संसद में इस पर गुमराह करना पूरी तरह अनुचित है।
Modi ji, roll back the UPI tax. Now. pic.twitter.com/IIt46zMgCG
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 16, 2026
