मंत्री विजय शाह को राहत! कैबिनेट के बाद राज्यपाल ने रोकी अभियोजन की मंजूरी, आगे क्या करेगा सुप्रीम कोर्ट?

भोपाल। भारतीय सेना की जांबाज महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान देने के मामले में मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कुंवर विजय शाह को बड़ी कानूनी व राजनीतिक राहत मिलती दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, राज्य कैबिनेट द्वारा मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा यानि अभियोजन न चलाने की सिफारिश वाले प्रस्ताव को राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने मंजूरी दे दी है। राजभवन से इस संबंध में औपचारिकता पूरी होने के बाद संबंधित फाइल सरकार को वापस भेज दी गई है।

इस पूरे घटनाक्रम और राज्यपाल के फैसले की आधिकारिक जानकारी अब सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जहां इस मामले पर अंतिम फैसला होना तय माना जा रहा है।

कैबिनेट ने भेजा था प्रस्ताव, SIT ने मांगी थी मंजूरी

इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल द्वारा पूरी कर ली गई है। एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर सीलबंद रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की थी और विजय शाह के विरुद्ध आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार से कानूनी तौर पर अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी।

पिछले हफ्ते हुई मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में यह प्रस्ताव लाया गया था कि विजय शाह पूर्व में सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं, इसलिए उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति न दी जाए।  कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को अंतिम निर्णय के लिए राजभवन भेजा था, जहां से अब इसे हरी झंडी मिलने की खबर सामने आई है।

सुप्रीम कोर्ट करेगा अंतिम समीक्षा

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की पीठ को सूचित किया गया था कि सक्षम प्राधिकारी के स्तर पर निर्णय की प्रक्रिया जारी है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि सक्षम प्राधिकारी का निर्णय आने के बाद ही आगे की विधिक प्रक्रिया तय होगी। अब जब सरकार और राजभवन ने अभियोजन चलाने से इनकार कर दिया है, तो राज्य सरकार यह पक्ष सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेगी, जिसके बाद शीर्ष अदालत तय करेगी कि इस निर्णय को स्वीकार किया जाए या न्यायिक समीक्षा के तहत कोई अन्य आदेश जारी किया जाए।

अब तक क्या?

बयान का विवाद (मई 2025)

मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने इंदौर के महू में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर अत्यधिक आपत्तिजनक और विवादित टिप्पणी की थी।

हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान

मंत्री के इस बयान पर भारी जनआक्रोश फैला। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए कड़ा रुख अपनाया और धार्मिक सौहार्द्र बिगाड़ने व मर्यादा लांघने के आरोपों के तहत मंत्री के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट में अपील और SIT का गठन

हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ विजय शाह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत ने FIR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया।

माफी बनाम कानूनी कार्रवाई

मंत्री शाह ने मामले के तूल पकड़ने पर सार्वजनिक मंचों पर माफी मांगने की दलील दी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा अभियोजन स्वीकृति पर फैसला लेने में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए कड़े दिशा-निर्देश दिए थे।

वर्तमान स्थिति

SIT जांच पूरी कर चुकी है। राज्य सरकार की कैबिनेट ने अभियोजन न चलाने का निर्णय लेकर राजभवन भेजा, जिसे राज्यपाल की हरी झंडी मिल चुकी है। अब पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की विधिक समीक्षा पर टिका हुआ है।

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