खुली जेल के लिए नियम तय: हत्यारे, रेप और POCSO दोषियों की एंट्री बैन, जानिए किसे मिलेगा मौका

खुली जेल

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने जेलों में लंबे समय से सजा काट रहे बंदियों के पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य में खुली जेलों के संचालन और वहां बंदियों को रखने के लिए पात्रता के नियम निर्धारित कर दिए गए हैं। इसके तहत ऐसे कैदियों को खुली जेल में स्थानांतरित किया जा सकेगा, जिनका जेल के अंदर व्यवहार अच्छा रहा है और जिन्होंने सजा के दौरान किसी तरह का कारागार अपराध नहीं किया है। हालांकि, हर कैदी को खुली जेल में जाने का अधिकार नहीं होगा। सरकार ने गंभीर और जघन्य अपराधों में दोषसिद्ध बंदियों के लिए स्पष्ट तौर पर इस सुविधा पर रोक लगाई है। बलात्कार, हत्या, POCSO समेत कई गंभीर मामलों में सजा काट रहे कैदी खुली जेल में स्थानांतरण के लिए पात्र नहीं होंगे।

पथर्रा में तैयार हुई खुली जेल

बेमेतरा जिले के ग्राम पथर्रा में खुली जेल का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके अलावा प्रदेश के दूसरे जिलों में 13 और खुली जेल बनाए जाने की योजना है। इन जेलों में ऐसे बंदियों को रखने की व्यवस्था होगी, जिन्हें सामान्य जेल से बाहर अपेक्षाकृत खुले वातावरण में रहकर काम करने और समाज में वापस लौटने के लिए तैयार किया जा सकता है। सरकार द्वारा बनाए गए नियमों में बंदियों की उम्र, सजा की अवधि, स्वास्थ्य, आचरण और अपराध की प्रकृति समेत कई बिंदुओं को शामिल किया गया है।

10 साल या उससे ज्यादा की सजा जरूरी

खुली जेल में जाने के लिए बंदी को निर्धारित शर्तों को पूरा करना होगा। इसमें सबसे अहम शर्त सजा की अवधि से जुड़ी है। आजीवन कारावास या 10 वर्ष अथवा उससे अधिक की सजा पाए बंदी ही निर्धारित अन्य मापदंडों को पूरा करने पर इस सुविधा के लिए विचार योग्य होंगे। बंदी की उम्र 30 वर्ष से अधिक और 60 वर्ष से कम होनी चाहिए। इसके साथ ही उसका पिछला चरित्र अच्छा होना और जेल में उसका आचरण संतोषजनक होना जरूरी है।

7 साल की सजा काट चुके बंदियों को प्राथमिकता

नियमों के मुताबिक बंदी ने अर्जित परिहार को छोड़कर कम से कम 7 साल की सजा पूरी की होनी चाहिए। इसमें कम से कम 3 साल की अवधि दोषसिद्ध बंदी के तौर पर पूरी करना जरूरी होगा। इसके अलावा बंदी को कम से कम दो बार पश्चात्वर्ती छुट्टी यानी पैरोल आदि पर जाने का अनुभव होना चाहिए। शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होने के साथ वह श्रम करने में भी सक्षम होना चाहिए।

गंभीर अपराधों के दोषियों के लिए बंद रहेगा रास्ता

खुली जेल की सुविधा देते समय अपराध की गंभीरता को भी अहम आधार बनाया गया है। हत्या के प्रयास, डकैती, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों जैसे मामलों में दोषसिद्ध बंदियों को खुली जेल में भेजने की अनुमति नहीं होगी।बलात्कार और POCSO एक्ट से जुड़े मामलों में दोषसिद्ध बंदियों को भी इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। इसके अलावा NSA, छत्तीसगढ़ विशेष जनसुरक्षा अधिनियम, UAPA, TADA, POTA, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और NDPS एक्ट जैसे कानूनों के तहत निरुद्ध या दोषसिद्ध बंदी भी खुली जेल के लिए पात्र नहीं होंगे।

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मृत्युदंड वाले कैदियों को भी नहीं मिलेगी सुविधा

जिन बंदियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है, वे भी खुली जेल में स्थानांतरण के दायरे से बाहर रहेंगे। इसी तरह जिनकी फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदला गया है, उन्हें भी इस सुविधा के लिए पात्र नहीं माना जाएगा। अविवाहित बंदी, छत्तीसगढ़ के मूल निवासी नहीं होने वाले बंदी और उस जिले के निवासी बंदी, जहां संबंधित खुली जेल स्थित है, भी नियमों के तहत अयोग्य होंगे। मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम घोषित बंदियों को भी खुली जेल में नहीं रखा जाएगा।

आवेदन से लेकर चयन तक पूरी प्रक्रिया तय

खुली जेल में भेजे जाने वाले बंदियों का चयन एक निर्धारित प्रक्रिया के जरिए होगा। पात्र बंदी संबंधित जेल अधीक्षक के पास आवेदन कर सकेंगे। जेल स्तर पर प्रक्रिया के बाद पात्र बंदियों की सूची हर तीन महीने में खुली जेल के अधीक्षक को भेजी जाएगी। इसके बाद उच्चस्तरीय समिति बंदियों के नामों पर अंतिम निर्णय लेगी। समिति की अध्यक्षता महानिदेशक, जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं करेंगे। इसमें जेल उप महानिरीक्षक या सहायक महानिरीक्षक, नामांकित केंद्रीय जेल अधीक्षक और खुली जेल अधीक्षक शामिल होंगे।

जेल से बाहर निकलने से पहले काम और जिम्मेदारी का प्रशिक्षण

खुली जेल व्यवस्था का उद्देश्य सिर्फ कैदियों को कम प्रतिबंधों वाले माहौल में रखना नहीं, बल्कि उन्हें भविष्य के सामान्य जीवन के लिए तैयार करना भी है। इसके लिए खुली जेलों में कृषि, पशुपालन, जेल उद्योग और अन्य रोजगार आधारित गतिविधियां कराई जाएंगी। इन गतिविधियों के जरिए बंदियों को काम से जोड़ने और उनमें आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करने पर जोर रहेगा। इन कार्यों से होने वाली आय राज्य शासन के खाते में जमा की जाएगी।

सरकार का फोकस पुनर्वास पर

खुली जेल की यह व्यवस्था लंबे समय से सजा काट रहे उन बंदियों के लिए पुनर्वास का माध्यम बन सकती है, जिनका व्यवहार जेल में अच्छा रहा है और जो निर्धारित मापदंडों को पूरा करते हैं। वहीं गंभीर अपराधों में दोषसिद्ध कैदियों को इससे बाहर रखकर सरकार ने सुरक्षा और अपराध की प्रकृति को भी प्राथमिकता दी है। पैरोल और अन्य छुट्टियों के मामलों में बंदियों पर बंदी अधिनियम, 1900 और छत्तीसगढ़ बंदी अवकाश नियम, 1989 के प्रावधान लागू रहेंगे।

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