600 से ज्यादा मौतें और 2500 लापता! वैश्विक दबाव के आगे झुकी नेपाल सरकार, मदद के लिए उतरा भारत का C-130 विमान
काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने अब तक का सबसे भयावह रूप ले लिया है। देश में मची भारी तबाही और 2500 से अधिक लोगों के लापता होने के बीच नेपाल सरकार ने विदेशी राहत और बचाव टीमों को न बुलाने के अपने पिछले फैसले को वापस ले लिया है। विभिन्न देशों के राजनयिक दबाव और नागरिकों के लापता होने की चिंताओं के बाद नेपाल ने सीमित अंतरराष्ट्रीय मदद स्वीकार करने पर सहमति जताई है। संकट की इस घड़ी में भारत ने सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाते हुए भारतीय वायुसेना के विमान और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को काठमांडू भेज दिया है।
नेपाल सरकार को क्यों बदलना पड़ा फैसला?
शुरुआत में 26 जून को नेपाल सरकार ने दावा किया था कि उसके स्थानीय सुरक्षा बल और बचाव दल स्थिति संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं, इसलिए किसी भी विदेशी बचाव दल को अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, भारी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने के बाद संबंधित देशों ने काठमांडू पर राजनयिक दबाव बनाया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव के चलते अब चुनिंदा क्षेत्रों, विशेषकर DNA टेस्ट, फॉरेंसिक जांच और जटिल बचाव कार्यों के लिए सीमित संख्या में विदेशी एक्सपर्ट्स को आने की अनुमति दी गई है।
भारत ने भेजी 10 टन राहत सामग्री, टेक्निकल टीम पहुंची काठमांडू
आपदा प्रभावित लोगों की सहायता के लिए भारत तेजी से ग्राउंड पर उतरा है:
राहत सामग्री की खेप: भारतीय वायु सेना (IAF) का सी-130 (C-130) विशेष परिवहन विमान 10 टन आवश्यक राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंच चुका है। इसमें जरूरी दवाइयां, मेडिकल किट और खाने-पीने का सामान शामिल है।
बचाव अभियान: भारत की एक विशेष टेक्निकल टीम काठमांडू पहुंच चुकी है और भारतीय वायुसेना वहां स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है।
तबाही का खौफनाक मंजर और भारतीयों की स्थिति
नेपाल में आई इस बाढ़ ने भारी जनहानि की है:
मौत और लापता: अब तक 626 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।
भारतीय नागरिक: आपदा में करीब 320 भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के 100 लोगों से अभी तक संपर्क नहीं हो सका है, जिनकी तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है।
राहत की खबर: तिब्बत क्षेत्र में मौजूद करीब 400 भारतीय नागरिकों से संपर्क स्थापित हो चुका है और वे सभी पूरी तरह सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
