3 लाख करोड़ का टारगेट और DRDO की तकनीक… जानिए राजनाथ सिंह के इस फैसले से कैसे कांपेंगे दुश्मन?

नई दिल्ली। रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनने और दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत सरकार ने एक बेहद बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की तकनीक को भारतीय रक्षा कंपनियों को ट्रांसफर करने की ऐतिहासिक मंजूरी दे दी है।

क्या है रक्षा मंत्रालय का यह बड़ा फैसला?

इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि अब तक जो मिसाइलें सिर्फ DRDO तक सीमित थीं वे अब देश की योग्य प्राइवेट कंपनियां और MSME भी बना सकेंगी।

तकनीक का हस्तांतरण: रक्षा मंत्रालय के अनुसार, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से योग्य भारतीय उद्योगों को पारंपरिक मिसाइल सिस्टम के बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन का सीधा मौका मिलेगा।

जरूरी शर्तें: इन कंपनियों को मिसाइल निर्माण के लिए जरूरी योग्यता, सर्टिफिकेशन और रेगुलेटरी नियमों को पूरा करना अनिवार्य होगा।

आखिर क्यों लिया गया यह मास्टरस्ट्रोक फैसला?

भारत के इस कदम को रक्षा क्षेत्र में ‘गेम-चेंजर’ माना जा रहा है, जिसके पीछे कई अहम रणनीतिक कारण हैं:

विदेशी निर्भरता होगी खत्म: देश में ही मिसाइल डेवलपमेंट की प्रोसेस तेज होगी और हथियारों के लिए विदेशों पर निर्भरता घटेगी।

पड़ोसियों की चालबाजी का करारा जवाब: यह कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है जब चीन की मदद से पाकिस्तान अपनी अंतरिक्ष और मिसाइल क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रहा है।

MSME को मजबूती: इससे भारत का घरेलू रक्षा औद्योगिक ढांचा मजबूत होगा और सप्लाई चेन में MSME की भागीदारी बढ़ेगी।

3 लाख करोड़ के डिफेंस प्रोडक्शन का महा-टारगेट

भारत का रक्षा उत्पादन और हथियारों का निर्यात इस वक्त अपने चरम पर है:

रिकॉर्ड उत्पादन: साल 2024-25 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन अपने सबसे ऊंचे स्तर 1.54 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।

निर्यात में ऐतिहासिक उछाल: हथियारों का निर्यात भी रिकॉर्ड 23,622 करोड़ रुपए दर्ज किया गया है।

भविष्य का लक्ष्य: सरकार ने चालू वित्त वर्ष में इसे 1.75 लाख करोड़ और साल 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

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