8 मासूमों की मौत पर सरकार का बड़ा एक्शन, मंत्री के दौरे के बाद 2 बड़े अफसर हुए पदमुक्त
बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में खसरे और मलेरिया के प्रकोप से हुई 8 मासूम बच्चों की मौत के मामले में मोहन यादव सरकार ने पहली बड़ी कार्रवाई की है। जिले के बैगा बहुल क्षेत्रों में टीकाकरण और स्वास्थ्य सुविधाओं में बरती गई भारी लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए, सरकार ने दो बड़े अधिकारियों को उनके पद से हटा दिया है। इस घटना के बाद से ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। सभी मृतक बच्चे विशेष रूप से पिछड़ी ‘बैगा जनजाति’ से ताल्लुक रखते थे।
इन दो बड़े अधिकारियों पर गिरी गाज
सरकार ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त एक्शन लेते हुए नए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है:
जिला टीकाकरण अधिकारी हटाए गए: लंबे समय से जिला टीकाकरण अधिकारी के पद पर पदस्थ परेश उपलव को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। परेश उपलव वर्तमान में CMHO के पद का प्रभार भी संभाल रहे हैं। उनकी जगह अब पारितोष शुक्ला को नया जिला टीकाकरण अधिकारी बनाया गया है।

जिला मलेरिया अधिकारी पर भी एक्शन: टीकाकरण अधिकारी के साथ-साथ जिला मलेरिया अधिकारी मनीषा जुनेजा को भी पद से हटा दिया गया है। उनके स्थान पर अब ब्रजेश कुमार पटेल को बालाघाट का नया मलेरिया अधिकारी नियुक्त किया गया है।

ICMR की रिपोर्ट और मंत्री के दौरे के बाद हुआ एक्शन
हाल ही में आईसीएमआर (ICMR) की जांच रिपोर्ट में जिले के बच्चों में खसरे के संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि हुई थी, जिसने स्वास्थ्य विभाग की पोल खोल दी थी। 21 अगस्त को मध्य प्रदेश के जनजाति कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने बालाघाट का सघन दौरा किया था। मंत्री के दौरे में बैगा बहुल इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही उजागर हुई थी, जिसके तुरंत बाद इन अधिकारियों को हटाने के आदेश जारी कर दिए गए।
आदिवासी इलाकों में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक खसरे और मलेरिया जैसी रोकथाम योग्य बीमारियों से 8 बच्चों की जान जाना सिस्टम की बड़ी विफलता मानी जा रही है। सरकार ने इस कार्रवाई से साफ संदेश दिया है कि विशेष पिछड़ी जनजातियों और सुदूर इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं से कोई भी समझौता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
