खजाने पर दबाव कम करने के लिए MP सरकार की नई नीति: एडवांस में पैसा खर्च करने वाले विभागों पर कसा शिकंजा!

भोपाल। मध् प्रदेश में राज्य के खजाने पर बढ़ते वित्तीय दबाव को कम करने और वित्तीय अनुशासन लागू करने के लिए मोहन यादव सरकार ने सख्त कदम उठाया है। मध्य प्रदेश वित्त विभाग ने केंद्रीय योजनाओं में फंड जारी करने की प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा U-TURN लिया है।

वित्त विभाग द्वारा जारी नए और सख्त आदेश के मुताबिक अब राज्य सरकार की नई नीति “पहले केंद्र का पैसा, फिर राज्य का पैसा” होगी। यानी जब तक दिल्ली से केंद्र सरकार के हिस्से का फंड नहीं आ जाता, तब तक राज्य सरकार अपने हिस्से का फंड जारी नहीं करेगी।

एडवांस पेमेंट पर पूरी तरह से रोक

पहले की व्यवस्था में कई बार केंद्र से पैसा आने में देरी होने पर भी योजनाएं न रुकें, इसके लिए विभाग राज्य के खजाने से एडवांस पैसा खर्च कर लेते थे। लेकिन अब वित्त विभाग ने इस पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

CS/CSS योजनाओं में रोक: केंद्र प्रायोजित योजनाओं और केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं में अब राज्य के खजाने से कोई एडवांस पेमेंट नहीं किया जा सकेगा।

अधिकारियों पर कसा शिकंजा: केंद्र की राशि आने से पहले ही अपनी मर्जी से राज्य का पैसा खर्च करने वाले विभागों और अधिकारियों पर अब नकेल कसी गई है।

पुरानी खर्च की गई राशि का देना होगा हिसाब

वित्त विभाग ने सिर्फ भविष्य के लिए ही नियम सख्त नहीं किए हैं, बल्कि पुरानी फाइलों को भी खंगालने का निर्देश दिया है।

जिन विभागों ने पहले से ही केंद्र का पैसा आने से पहले राज्य का पैसा खर्च कर दिया है, उन्हें उस पूरी राशि की एक विस्तृत लिस्ट तैयार करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

राज्य सरकार द्वारा खर्च किए गए इस एडवांस पैसे की भरपाई के लिए संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों को 100% केंद्रांश की वसूली के लिए सीधे प्रस्ताव भेजे जाएंगे।

ट्रेजरी में जमा होगा CNA का पैसा

फंड के सही प्रबंधन के लिए यह भी तय किया गया है कि सेंट्रल नोडल एजेंसी (CNA) से जो राशि सीधे बैंक खातों में आती थी, उसे अब अनिवार्य रूप से राज्य की ट्रेजरी में ही जमा कराना होगा। इसके अलावा, वेतन वाली योजनाओं में सिंगल नोडल एजेंसी रिफंड को पूर्व-निर्धारित हेड में ही करना अनिवार्य कर दिया गया है।

बजट कंट्रोल अधिकारी होंगे जिम्मेदार

इस पूरी नई व्यवस्था में जवाबदेही भी तय कर दी गई है। अगर केंद्र से पैसा आने में कोई भी देरी होती है, तो इसके लिए संबंधित विभाग के बजट कंट्रोल अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे। उन्हें ही केंद्र से समन्वय कर पैसा समय पर लाने की जिम्मेदारी उठानी होगी।

वित्त विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि इस नए आदेश को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। सरकार की इस नई नीति का सीधा मकसद राज्य के खजाने पर अनावश्यक रूप से पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करना और वित्तीय प्रबंधन को बेहतर बनाना है।

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