15 अगस्त पर PM मोदी के पहनावे पर क्यों मचा बवाल? उल्टा तिरंगा या स्टाइलिंग फोल्ड… समझिए क्या कहता है ध्वज संहिता का नियम!
नई दिल्ली। 15 अगस्त 2026 को देश ने अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस बेहद उत्साह के साथ मनाया। लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश के विकास और ‘सप्तधारा’ विजन का रोडमैप प्रस्तुत किया। हालांकि इस ऐतिहासिक संबोधन के साथ ही प्रधानमंत्री के पहनावे और उनकी नेहरू जैकेट पर लगे तीन रंगों वाले पॉकेट स्क्वायर को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद छिड़ गया है।
क्या है पूरा ‘पॉकेट स्क्वायर’ विवाद?
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री पारंपरिक सफेद कुर्ता-पायजामा, भूरे रंग की जैकेट और रंगीन साफे के साथ नजर आए थे। उनकी जैकेट की जेब में तीन रंगों केसरिया, सफेद और हरा कलर का पॉकेट स्क्वायर लगा हुआ था।
संबोधन के दौरान जब कैमरों की नजर उनकी पोशाक पर पड़ी तो पॉकेट स्क्वायर में रंगों के क्रम को लेकर सवाल उठने लगे। विपक्ष का आरोप है कि पॉकेट स्क्वायर में हरा रंग ऊपर और केसरिया रंग नीचे दिखाई दे रहा था जो कि भारतीय तिरंगे के आधिकारिक क्रम के विपरीत है।
कांग्रेस का तीखा हमला: ‘आयरलैंड का इंडिपेंडेंस डे मना रहे?’
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने तुरंत पीएम मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा:
पवन खेड़ा का तंज: कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि लगता है साहब ने उर्दू में तिरंगा पहना है। या फिर भारत की जगह आयरलैंड का इंडिपेंडेंस डे मना रहे हैं।
सुप्रिया श्रीनेत की टिप्पणी: कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए इसे राष्ट्रध्वज के प्रदर्शन में लापरवाही और अनुचित तरीका करार दिया।
क्या कहता है भारतीय ध्वज संहिता?
रंगों का क्रम: ध्वज संहिता 2002 के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज में सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और सबसे नीचे हरा रंग होना अनिवार्य है।
कपड़ों में इस्तेमाल: नियमों के मुताबिक राष्ट्रीय ध्वज को किसी भी प्रकार की पोशाक या परिधान के रूप में नहीं पहना जा सकता। हालांकि तिरंगे के रंगों वाले कपड़े या पॉकेट स्क्वायर का फैशन एक्सेसरी के रूप में प्रयोग किया जा सकता है, बशर्ते वह आधिकारिक ध्वज न हो।
फैशन बनाम विवाद
समर्थकों और फैशन विशेषज्ञों का कहना है कि पॉकेट स्क्वायर एक स्टाइलिंग एक्सेसरी है। जेब में कपड़े को फोल्ड करते समय रंगों का क्रम बदल जाना एक स्वाभाविक बात है। वहीं आलोचकों का मानना है कि वैश्विक मंच पर देश के प्रधानमंत्री के लुक में छोटी-छोटी डिटेल्स का ध्यान रखा जाना चाहिए।
