नक्सलवाद छोड़ा, अब फैशन शो में बिखेरा जलवा! तालियों से गूंज उठा पूरा ऑडिटोरियम

रैंप पर उतरीं पूर्व महिला नक्सली, कोसा सिल्क में दिखा नए जीवन का आत्मविश्वास

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित एक खास फैशन शो ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस आयोजन में सुकमा के पुनर्वास केंद्र से आईं आत्मसमर्पित पूर्व महिला माओवादियों ने पारंपरिक हथकरघा परिधानों में रैंप वॉक किया। कोसा सिल्क और स्थानीय हथकरघा से बने खूबसूरत कपड़ों में सजी इन महिलाओं का आत्मविश्वास देखकर पूरा ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा।

यह कार्यक्रम सिर्फ फैशन और खूबसूरत परिधानों तक सीमित नहीं रहा। रैंप पर उतरी महिलाओं की कहानी ने हिंसा से शांति, संघर्ष से पुनर्वास और अलगाव से मुख्यधारा तक के सफर को सामने रखा।

पुनर्वास केंद्र से रैंप तक पहुंचीं महिलाएं

इस खास रैंप वॉक में सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्र से आईं आत्मसमर्पित महिलाओं ने हिस्सा लिया। इनमें पुनेम देवे, मीडियम गंगी, मड़वी देवे, मड़वी नदन्नी, मड़वी माले, पोड़ियाम राजे, डोड्डी रमे, मड़काम भीमे और पुनेम जोयट्टी शामिल थीं।

इन महिलाओं ने पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप पर कदम रखा और अपने जीवन के नए अध्याय का संदेश दिया। उनके लिए यह सिर्फ मंच पर चलने का मौका नहीं था, बल्कि समाज की मुख्यधारा में लौटने और अपनी नई पहचान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी था।

कोसा सिल्क और हथकरघा परिधानों में दिखा नया अंदाज

रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व महिला माओवादियों ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा सिल्क और स्थानीय हथकरघा से तैयार परिधान पहनकर रैंप वॉक किया।

पारंपरिक कपड़ों में उनका आत्मविश्वास और सहजता दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रही। रैंप वॉक खत्म होने के बाद पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

फैशन शो से कहीं ज्यादा था यह आयोजन

इस कार्यक्रम का महत्व सिर्फ फैशन तक सीमित नहीं था। यह उन महिलाओं की बदली हुई जिंदगी को सामने लाने का प्रयास था, जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति, विकास और पुनर्वास को चुना है।

रैंप पर उनकी मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि आत्मसमर्पण के बाद सिर्फ सुरक्षा और पुनर्वास ही नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीवन जीने और समाज में अपनी अलग पहचान बनाने के अवसर भी उपलब्ध हो सकते हैं।

CM साय ने भी की महिलाओं से बातचीत

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी इन आत्मसमर्पित महिलाओं से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने उनके नए जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं और उनके आत्मविश्वास को सराहा।

इन महिलाओं का रैंप वॉक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से मुख्यधारा की ओर हो रहे बदलाव और पुनर्वास की कोशिशों की एक अलग तस्वीर पेश करता नजर आया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

कार्यक्रम के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में पारंपरिक हथकरघा परिधान पहने महिलाएं पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप पर चलती नजर आ रही हैं।

सोशल मीडिया यूजर्स इस बदलाव को प्रेरणादायक बता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि जिस क्षेत्र ने लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद की चुनौती देखी, वहां से निकलकर महिलाओं का इस तरह आत्मविश्वास के साथ मुख्यधारा में कदम रखना बदलाव की बड़ी तस्वीर दिखाता है।

नए छत्तीसगढ़ की तस्वीर पेश करता आयोजन

रायपुर का यह आयोजन हथकरघा, संस्कृति और पुनर्वास—तीनों को एक साथ जोड़ता नजर आया। एक ओर जहां कोसा सिल्क और स्थानीय हथकरघा ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पहचान को मंच दिया, वहीं आत्मसमर्पित महिलाओं की भागीदारी ने सामाजिक बदलाव और पुनर्वास की कहानी को सामने रखा।

इन महिलाओं का रैंप वॉक इस बात का प्रतीक बन गया कि अतीत चाहे कितना भी कठिन क्यों न रहा हो, सही अवसर और इच्छाशक्ति के साथ जिंदगी को नई दिशा दी जा सकती है।

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