Smart Meter Surrender Abhiyan: शहर के बाद अब गांवों में पहुंचेगी कांग्रेस! स्मार्ट मीटर के खिलाफ चलेगा बड़ा अभियान, जानिए क्या है पूरा प्लान
शहरों के बाद अब छत्तीसगढ़ के गांवों में भी Smart Meter Surrender Abhiyan पहुंचाएगी कांग्रेस
Smart Meter Surrender Abhiyan: स्मार्ट मीटर को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत अब गांवों तक पहुंचने वाली है। कांग्रेस शहरों के बाद ग्रामीण इलाकों में लोगों से स्मार्ट मीटर सरेंडर फॉर्म भरवाने की तैयारी में है। आखिर कांग्रेस इस अभियान के जरिए ग्रामीणों को क्या बताएगी, किन नेताओं को जिम्मेदारी मिली है और BJP ने पलटवार करते हुए कांग्रेस से कौन-सा सवाल पूछ दिया? जानिए पूरे अभियान की अंदर की कहानी।
Smart Meter Surrender Abhiyan: अब गांवों में पहुंचेगा कांग्रेस का स्मार्ट मीटर अभियान
छत्तीसगढ़ में महंगी बिजली और स्मार्ट मीटर को लेकर सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। कांग्रेस पिछले करीब पखवाड़े से प्रदेशभर में Smart Meter Surrender Abhiyan चला रही है और अब इस अभियान को शहरों से निकालकर गांवों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है। पार्टी ने ग्रामीण इलाकों में अभियान को मजबूत करने के लिए सभी जिलों में प्रभारी नियुक्त किए हैं।
कांग्रेस का दावा है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं को अधिक बिजली बिल मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। पार्टी अब इन्हीं शिकायतों को मुद्दा बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के बीच पहुंचने की तैयारी कर रही है।
पूर्व सांसदों और मंत्रियों को दी गई जिम्मेदारी
ग्रामीण इलाकों में अभियान को गति देने के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी यानी PCC ने कई वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री, विधायक और पूर्व विधायक शामिल हैं।
इन नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर ग्रामीणों से संपर्क करने और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों की जानकारी लेने के साथ ही सरेंडर फॉर्म भरवाने की जिम्मेदारी दी गई है।
कांग्रेस का फोकस खासतौर पर उन उपभोक्ताओं पर है, जो अधिक बिजली बिल आने की शिकायत कर रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को अभियान के बारे में जानकारी देंगे।
ग्रामीणों को क्या बताएगी कांग्रेस?
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अभियान के दौरान ग्रामीणों को बिजली की मौजूदा व्यवस्था और स्मार्ट मीटर से जुड़ी उनकी शिकायतों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
पार्टी कार्यकर्ता लोगों के बीच यह मुद्दा भी उठाएंगे कि भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सरकार की बिजली बिल हाफ योजना को बंद कर दिया और बिजली महंगी होने का आरोप भी कांग्रेस लगा रही है।
पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू का कहना है कि महंगी बिजली की वजह से प्रदेश की जनता भाजपा सरकार से नाराज है। उनके मुताबिक इसी कारण स्मार्ट मीटर सरेंडर फॉर्म की मांग शहरों के साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रही है।
शहर के बाद अब गांव में बढ़ेगा अभियान
कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर सरेंडर अभियान की शुरुआत पहले शहरी इलाकों में की थी। अब पार्टी इसे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों तक ले जाने की तैयारी कर रही है।
इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं तक पहुंचना और स्मार्ट मीटर को लेकर उनकी शिकायतों को एक मंच पर लाना बताया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को गांवों में जाकर लोगों से सीधे संवाद करने की जिम्मेदारी दी गई है।
BJP ने कांग्रेस से पूछा बड़ा सवाल
कांग्रेस के इस अभियान पर भाजपा की ओर से भी पलटवार किया गया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिया ने कांग्रेस के अभियान पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि स्मार्ट मीटर लगाने का फैसला आखिर किस सरकार के कार्यकाल में लिया गया था।
यानी एक तरफ कांग्रेस स्मार्ट मीटर और बिजली बिल को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साध रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस की पिछली सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा कर रही है।
स्मार्ट मीटर पर आगे और तेज हो सकती है सियासत
स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस के इस नए अभियान से आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति और गरमाने के आसार हैं। खास बात यह है कि अब पार्टी इसे केवल शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि गांवों तक पहुंचाकर इसे व्यापक मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस नेताओं की सक्रियता बढ़ने के बाद यह देखना अहम होगा कि स्मार्ट मीटर सरेंडर अभियान को लोगों का कितना समर्थन मिलता है और सरकार की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है।
फिलहाल स्मार्ट मीटर, बिजली के बिल और उपभोक्ताओं की शिकायतों को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं और आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की सियासत में और बड़ा रूप ले सकता है।
