Quick Commerce पर बढ़ी टेंशन! Blinkit-Zepto की तेज डिलीवरी से डार्क स्टोर की हाइजीन तक उठे सवाल
नई दिल्ली: घर बैठे कुछ ही मिनटों में दूध, सब्जियां, स्नैक्स या रोजमर्रा का जरूरी सामान मिल जाना आज शहरों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन जिस सुविधा ने ग्राहकों को लंबी कतार और घंटों के इंतजार से राहत दी, उसी Quick Commerce मॉडल की दूसरी तस्वीर भी अब सामने आ रही है।
तेज डिलीवरी के इस कारोबार में अब सवाल सिर्फ इस बात पर नहीं हैं कि सामान कितनी जल्दी पहुंचता है। डिलीवरी राइडर्स की सुरक्षा, डार्क स्टोर्स में खाद्य पदार्थों की साफ-सफाई और वेयरहाउस में सामान के रखरखाव को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। Blinkit और Zepto से जुड़े स्टोर्स पर हुई हालिया कार्रवाई ने इन सवालों को और हवा दे दी है।
10 मिनट की डिलीवरी पर सरकार ने क्यों जताई चिंता?
Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे प्लेटफॉर्म ने लंबे समय तक तेज डिलीवरी को अपनी पहचान बनाया। खासतौर पर 10 मिनट में सामान पहुंचाने का दावा ग्राहकों के बीच इन सेवाओं को लोकप्रिय बनाने में अहम रहा।
हालांकि, जनवरी 2026 में केंद्र सरकार ने कंपनियों को 10 मिनट की डिलीवरी को प्रमोट नहीं करने की सलाह दी। इसके पीछे प्रमुख चिंता डिलीवरी पार्टनर्स की सड़क सुरक्षा को लेकर बताई गई।
दरअसल, कम समय में ऑर्डर पूरा करने की होड़ में राइडर्स पर तेजी से वाहन चलाने और ट्रैफिक के बीच जल्द से जल्द पहुंचने का दबाव पड़ सकता है। इसके बाद कई क्विक कॉमर्स कंपनियों ने अपनी मार्केटिंग और ब्रांडिंग से 10 मिनट डिलीवरी के दावों को हटाना शुरू किया।
ग्राहक को दिखती है स्पीड, राइडर का दबाव नहीं
मोबाइल ऐप पर ऑर्डर करते वक्त ग्राहक को बस यह नजर आता है कि उसका सामान कुछ ही मिनट में पहुंचने वाला है। लेकिन उस समय सीमा को पूरा करने के पीछे डिलीवरी पार्टनर को किस तरह काम करना पड़ता है, यह तस्वीर अक्सर नजर नहीं आती।
ऑर्डर लेने, डार्क स्टोर तक पहुंचने, सामान कलेक्ट करने और फिर ग्राहक के पते तक डिलीवरी करने के दौरान हर मिनट महत्वपूर्ण हो जाता है।
गिग वर्कर्स से जुड़े संगठनों ने भी टाइम-बाउंड डिलीवरी को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि लगातार समय के दबाव में काम करने से सड़क पर जल्दबाजी और दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है।
अब डार्क स्टोर की साफ-सफाई भी सवालों में
क्विक कॉमर्स कंपनियां आमतौर पर डार्क स्टोर मॉडल के जरिए काम करती हैं। ये ऐसे स्टोरेज सेंटर होते हैं जहां आम ग्राहक जाकर खरीदारी नहीं करता। ऑनलाइन ऑर्डर आने के बाद यहीं से सामान चुना, पैक किया जाता है और डिलीवरी के लिए भेजा जाता है। इसलिए इन स्टोर्स में खाद्य पदार्थों की स्टोरेज और हाइजीन बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
हाल ही में महाराष्ट्र FDA की कार्रवाई से जुड़े एक मामले में मुंबई के मलाड वेस्ट स्थित Blinkit के डार्क स्टोर का फूड लाइसेंस सस्पेंड किए जाने की जानकारी सामने आई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान फल और सब्जियों के आसपास कथित तौर पर कॉकरोच और गंदगी पाई गई।
यह मामला सामने आने के बाद सवाल उठा कि ग्राहक को सामान भले ही कुछ मिनट में मिल जाए, लेकिन अगर स्टोरेज की स्थिति ठीक नहीं है तो उस तेज डिलीवरी का फायदा कितना है?
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Zepto के वेयरहाउस पर भी कार्रवाई
हाइजीन से जुड़े सवाल सिर्फ Blinkit तक सीमित नहीं रहे। Zepto से जुड़े एक वेयरहाउस पर भी अधिकारियों की कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
बेंगलुरु के होस्कोटे तालुक में Zepto से जुड़े एक वेयरहाउस को Food Safety and Drug Administration Department की कार्रवाई के बाद सील किया गया। जांच में खाने-पीने की चीजों की स्टोरेज और हैंडलिंग से जुड़ी कमियां मिलने की बात सामने आई।
इन घटनाओं से साफ है कि क्विक कॉमर्स कंपनियों के लिए चुनौती सिर्फ डिलीवरी को तेज रखना नहीं, बल्कि सामान को सुरक्षित और तय मानकों के मुताबिक स्टोर करना भी है।
10 मिनट में सामान पहुंचना ही काफी नहीं
कल्पना कीजिए कि आपने दूध, ब्रेड, फल, सब्जियां या पैकेज्ड फूड ऑर्डर किया और वह 10-15 मिनट में आपके घर पहुंच गया। लेकिन अगर उस सामान को स्टोर करने के दौरान जरूरी हाइजीन और फूड सेफ्टी नियमों का पालन नहीं हुआ तो तेज डिलीवरी का फायदा ही क्या रह जाता है?
यही वजह है कि क्विक कॉमर्स के विस्तार के साथ फूड सेफ्टी, स्टोरेज और क्वालिटी कंट्रोल पर भी उतना ही जोर देना जरूरी है। ग्राहक को सिर्फ तेज सर्विस नहीं चाहिए, बल्कि यह भरोसा भी चाहिए कि उसके घर पहुंच रहा सामान सुरक्षित है।
क्विक कॉमर्स के पीछे बड़ी संख्या में गिग वर्कर्स
इस पूरे बिजनेस मॉडल की रीढ़ सिर्फ ऐप और डार्क स्टोर नहीं हैं। इसके पीछे हजारों-लाखों Gig Workers और Delivery Partners काम करते हैं। सरकार ने 2026 में Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ Zomato, Uber, Ola और Rapido जैसी कंपनियों से जुड़े गिग वर्कर्स को e-Shram Portal पर रजिस्टर करने और उनके लिए सोशल सिक्योरिटी कवरेज बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इससे गिग इकॉनमी से जुड़े कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है।
अब कंपनियों के सामने क्या चुनौती?
Quick Commerce ने खरीदारी को बेहद आसान और तेज जरूर बना दिया है, लेकिन अब इस सेक्टर के सामने स्पीड और सेफ्टी के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। डिलीवरी पार्टनर सुरक्षित तरीके से काम करें, डार्क स्टोर में खाद्य पदार्थों की साफ-सफाई बनी रहे और ग्राहक तक पहुंचने वाला सामान सही स्थिति में हो—इन सभी पहलुओं पर कंपनियों को ध्यान देना होगा। आखिरकार ग्राहक को सामान 10 मिनट में मिलने से ज्यादा जरूरी है कि वह सुरक्षित और अच्छी गुणवत्ता में मिले।
