CGPSC 2021 भर्ती घोटाला: पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव को हाईकोर्ट से नहीं मिली जमानत, कोर्ट ने बताया गंभीर अपराध

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2021 भर्ती परीक्षा से जुड़े बहुचर्चित पेपर लीक और चयन अनियमितता मामले में जेल में बंद आयोग के पूर्व सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए मामले को बेहद गंभीर बताया है।

एकलपीठ के न्यायाधीश जस्टिस बी.डी. गुरु ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि प्रतियोगी परीक्षाओं की गोपनीयता से छेड़छाड़ लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित करती है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों से समाज का भरोसा और योग्य अभ्यर्थियों का विश्वास कमजोर होता है।

पेपर लीक और पद के दुरुपयोग के आरोप

सीबीआई जांच के अनुसार, जीवन किशोर ध्रुव ने वर्ष 2020 में CGPSC के सचिव का पद संभाला था और उनके कार्यकाल में ही 2021 भर्ती परीक्षा की अधिसूचना जारी हुई। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मुख्य परीक्षा के गोपनीय प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले अपने बेटे तक पहुंचाए सीबीआई का दावा है कि इसी कथित लाभ के आधार पर उनके बेटे सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर पद के लिए हुआ।

सीबीआई को तलाशी में मिले अहम दस्तावेज

जांच के दौरान सीबीआई ने आरोपी के भिलाई स्थित आवास पर तलाशी ली, जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। एजेंसी के अनुसार, मुख्य परीक्षा के प्रश्नों से जुड़े उत्तर, उत्तरपुस्तिकाएं और परीक्षा से पहले तैयार किए गए कुछ विषयों से संबंधित सामग्री बरामद हुई, जिनका परीक्षा प्रश्नपत्र से मेल मिलने का दावा किया गया है। इन बरामद दस्तावेजों को जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।

बचाव पक्ष ने लगाए झूठा फंसाने के आरोप

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि जीवन किशोर ध्रुव का नाम प्रारंभिक एफआईआर में शामिल नहीं था और उन्हें केवल सचिव पद पर रहने के कारण मामले में फंसाया गया है। उनका कहना था कि उन्होंने अपने बेटों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी पहले ही आयोग को दे दी थी तथा परीक्षा से जुड़े गोपनीय कार्यों से स्वयं को अलग रखा था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं और सीबीआई आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।

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सीबीआई ने किया जमानत का विरोध

सीबीआई ने अदालत में जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी एक जिम्मेदार लोकसेवक थे, जिन पर परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता बनाए रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान मिले दस्तावेज और गवाहों के बयान आरोपी की कथित भूमिका की ओर संकेत करते हैं।

क्या है CGPSC भर्ती घोटाला?

CGPSC भर्ती घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित भर्ती परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया से जुड़ा मामला है। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता से समझौता करते हुए प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों और परिचितों को लाभ पहुंचाया गया। प्रदेश सरकार द्वारा मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद कई अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। जांच अभी भी जारी है।

171 पदों के लिए हुई थी भर्ती

CGPSC की वर्ष 2021 भर्ती परीक्षा के माध्यम से कुल 171 पदों पर नियुक्तियां की जानी थीं। प्रारंभिक परीक्षा के बाद मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू आयोजित किए गए थे। अंतिम चयन सूची वर्ष 2023 में जारी हुई थी, जिसके बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया विवादों में आ गई।

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