मैहर की आंगनवाड़ी… पोषण आहार में नमक-पूड़ी! ये खाकर होगा नौनिहाल का शारीरिक और मानसिक विकास? 

तीन महीने पुराना बताकर विभाग बचने की कोशिश में, लेकिन सवाल वही क्या मासूम बच्चों का निवाला चोरी हो रहा है?

 

मध्य प्रदेश के मैहर जिले के ककरा गांव की आंगनवाड़ी से निकला एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। इसमें छोटे-छोटे मासूम बच्चे थालियों में बैठे सिर्फ पूरी और नमक खा रहे हैं। कोई सब्जी नहीं, कोई दाल नहीं, कोई पौष्टिक आहार नहीं सिर्फ नमक और पूरी। यह तस्वीर देखकर कोई भी संवेदनशील व्यक्ति का दिल कांप उठेगा। पोषण आहार के नाम पर बच्चों को यह मिल रहा है? यह सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार की व्यवस्था की नाकामी, लापरवाही और संभवतः भ्रष्टाचार का आईना है।

 

वीडियो वायरल होते ही महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप मच गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेंद्र बांगड़े ने जांच के आदेश दिए। परियोजना अधिकारी अखिलेश दीपांकर की रिपोर्ट आई वीडियो तीन महीने पुराना है, अधूरा शूट है, और 26 जुलाई की रात गांव में हुई मारपीट से जुड़ा है। भोजन प्रदाता शिवम स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष राधाबाई बीच-बचाव करने गई थीं, उनकी बेटी ने वीडियो बनाया। विभाग का आरोप है कि विपक्षी गुट ने दबाव बनाने के लिए इसे अब वायरल किया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सुमन जायसवाल उस दिन टीकाकरण ड्यूटी पर थीं, 62 वर्षीय सहायिका ऊषा गौतम केंद्र संभाल रही थीं। समूह को क्लीन चिट दे दी गई, हालांकि स्वीकार किया गया कि पहले अनियमितताओं के लिए जुर्माना लग चुका है।

 

यह बचाव सुनने में कितना खोखला लगता है! अगर वीडियो तीन महीने पुराना है, तो उस समय क्यों कोई कार्रवाई नहीं हुई? अगर अधूरा है, तो पूरा भोजन क्या था? बच्चों के मुंह से निकल रहे शब्द कि उन्हें यही मिलता है क्या झूठ हैं? विभाग की जांच रिपोर्ट एक तरफ कहानी बता रही है, लेकिन हकीकत दूसरी तरफ खड़ी है। आंगनवाड़ी केंद्र गरीब बच्चों के लिए जीवन रेखा होते हैं। यहां निर्धारित पोषण आहार में 500 कैलोरी और 12-15 ग्राम प्रोटीन होना चाहिए। पूरी और नमक से क्या मिलता है? सिर्फ खाली पेट भरने का झूठा आभास।

 

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मुद्दे को उठाकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। अपने एक्स हैंडल पर वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा “मैहर की आंगनवाड़ी! पोषण आहार में नमक-पूड़ी! कर्ज लेकर करप्शन और कमीशन का रिकॉर्ड बना चुकी भाजपा सरकार जगह-जगह बच्चों का निवाला छीन रही है! इस पाप के लिए भाजपा को कभी माफ नहीं किया जा सकता।” यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं है। पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा मध्य प्रदेश को टैग किया। विपक्ष सही कह रहा है जब सरकार खुद कर्ज में डूबी हो, कमीशनखोरी के आरोपों से घिरी हो, तो बच्चों के पोषण पर ध्यान कहां से देगी?

 

यह घटना अकेली नहीं है। मध्य प्रदेश में कुपोषण की स्थिति लंबे समय से चिंताजनक रही है। एनएफएचएस-6 के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में पांच वर्ष से कम उम्र के 31.4 प्रतिशत बच्चे अवरुद्ध वृद्धि (स्टंटिंग) से पीड़ित हैं, जबकि 39.7 प्रतिशत कम वजन के शिकार हैं। ये आंकड़े सरकार की नाकामी चिल्ला-चिल्लाकर बता रहे हैं। आंगनवाड़ी योजना देश की सबसे बड़ी पोषण योजनाओं में से एक है। केंद्र और राज्य सरकारें करोड़ों रुपये खर्च करती हैं। फिर भी मैहर जैसे इलाकों में बच्चे नमक-पूरी खा रहे हैं। पैसा कहां जा रहा है? कमीशन में, भ्रष्टाचार में, या सिर्फ कागजी काम में?

 

विभाग का यह दावा कि वीडियो पुराना है और साजिश है, जनता को बेवकूफ बनाने की कोशिश लगता है। अगर व्यवस्था सही होती, तो ऐसा वीडियो कभी नहीं बनता। अगर निगरानी सख्त होती, तो तीन महीने पहले की अनियमितता आज नहीं उभरती। शिवम समूह पर पहले जुर्माना लग चुका है यह खुद विभाग मान रहा है। फिर भी उन्हें फिर से जिम्मेदारी सौंपी गई। यह लापरवाही नहीं तो क्या है? बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। पूरी नमक के साथ खाने से बच्चों को क्या पोषण मिलेगा? उनके शरीर का विकास कैसे होगा? भविष्य कैसे बनेगा?

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार विकास के दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। आंगनवाड़ी केंद्रों में बुनियादी सुविधाएं, नियमित निगरानी, गुणवत्तापूर्ण भोजन इन सबकी कमी साफ दिखती है। जब कोई वीडियो वायरल होता है, तो जांच के आदेश जारी हो जाते हैं, रिपोर्ट आ जाती है, और मामला ठंडा पड़ जाता है। दोषियों पर कार्रवाई शायद ही कभी सख्ती से होती हो। यह व्यवस्था की बीमारी है। सरकार को चाहिए कि सिर्फ जांच रिपोर्ट पर भरोसा करने के बजाय स्वतंत्र जांच कराए, वीडियो की फॉरेंसिक जांच हो, बच्चों और अभिभावकों से बात की जाए, और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।

 

यह मुद्दा सिर्फ मैहर का नहीं, पूरे प्रदेश का है। कई जगहों से आंगनवाड़ी में घटिया भोजन, अनुपस्थिति, भ्रष्टाचार की शिकायतें आती रहती हैं। सरकार पोषण अभियान के नारे लगाती है, लेकिन मासूम बच्चों की थाली में नमक-पूरी आती है। यह शर्म की बात है। जीतू पटवारी सही कह रहे हैं बच्चों का निवाला छीनना पाप है। भाजपा सरकार को इस पाप का जवाब देना होगा। जनता अब सिर्फ वादों से संतुष्ट नहीं होगी। उसे परिणाम चाहिए सुरक्षित, पौष्टिक और नियमित भोजन।

 

अगर सरकार अब भी आंखें मूंदे रहती है, तो कुपोषण के आंकड़े और बिगड़ेंगे। मासूम बच्चे बीमार पड़ेंगे, उनका भविष्य अंधकारमय होगा। जिम्मेदारी मुख्यमंत्री से लेकर विभाग के अधिकारियों तक सभी की है। जांच रिपोर्ट को सिर्फ बचाव का हथियार न बनाएं। सच्चाई सामने लाएं, कार्रवाई करें, और सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा पोषण आहार के नाम पर नमक-पूरी न खाए। वरना यह लापरवाही इतिहास में सरकार की सबसे बड़ी विफलताओं में दर्ज हो जाएगी।

Youthwings