शिक्षा सुधार के दावों के बीच धमतरी की हकीकत! 48 स्कूलों में एक ही गुरुजी, शिक्षक छुट्टी पर रहे तो बच्चों की पढ़ाई भी ‘ऑफ’
धमतरी। मंचों पर शिक्षा सुधार के दावे खूब किए जाते हैं। नई योजनाओं और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की बातें भी कम नहीं होतीं। लेकिन धमतरी जिले के नगरी वनांचल की तस्वीर इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। यहां 48 प्राथमिक विद्यालय आज भी सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। सवाल यह है कि जब एक ही शिक्षक पहली से पांचवीं तक की पूरी पढ़ाई, रिकॉर्ड, सरकारी काम और स्कूल का संचालन संभाल रहा हो, तो आखिर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी?
एक गुरुजी… पांच कक्षाएं… और पूरा स्कूल
नगरी विकासखंड में कुल 338 प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 48 स्कूल ऐसे हैं जहां सिर्फ एक शिक्षक पदस्थ है। यानी एक ही शिक्षक पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी और पांचवीं कक्षा के बच्चों को अलग-अलग विषय पढ़ाने के साथ-साथ उपस्थिति रजिस्टर, सरकारी रिकॉर्ड, विभागीय रिपोर्ट और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभा रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि सरकार एक शिक्षक से स्कूल चलवाना चाहती है या पूरी शिक्षा व्यवस्था?
गुरुजी छुट्टी पर गए… तो स्कूल भी छुट्टी पर!
ग्रामीणों का कहना है कि जब किसी कारण से शिक्षक अवकाश पर चले जाते हैं या किसी सरकारी बैठक अथवा विभागीय कार्य में भेज दिए जाते हैं, तब पूरा स्कूल शिक्षक विहीन हो जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चों के हिस्से में शिक्षा नहीं, बल्कि सिर्फ मध्याह्न भोजन आता है। खाना खाने के बाद बच्चे घर लौट जाते हैं, क्योंकि पढ़ाने वाला कोई नहीं होता। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या शिक्षा विभाग के लिए बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा जरूरी कागजी आंकड़े हैं?
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शिक्षा व्यवस्था या आंकड़ों का खेल?
एक ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की बात करती है, दूसरी ओर कई स्कूल आज भी न्यूनतम शिक्षकों के बिना संचालित हो रहे हैं। जब एक शिक्षक पांच कक्षाओं को एक साथ संभालेगा तो हर बच्चे तक व्यक्तिगत रूप से पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है। इसका सीधा असर सीखने की गुणवत्ता और परीक्षा परिणामों पर पड़ता है।
ग्रामीणों की मांग—कम से कम दो शिक्षक हों
ग्रामीणों ने शासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि जिन स्कूलों में केवल एक शिक्षक पदस्थ है, वहां तत्काल कम से कम एक अतिरिक्त शिक्षक की नियुक्ति की जाए। उनका कहना है कि यदि हर प्राथमिक विद्यालय में न्यूनतम दो शिक्षक होंगे, तभी बच्चों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।
