रवि भगत के इस्तीफे के बाद DMF फंड को लेकर चर्चाएं तेज, कई सवाल बरकरार
छत्तीसगढ़ की राजनीति में बुधवार को उस समय हलचल बढ़ गई जब भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि उन्होंने रायगढ़ जिले के लैलूंगा मंडल अध्यक्ष रमेश होता को अपना इस्तीफा सौंपा है।
पत्र में पार्टी के प्रति जताया आभार
अपने इस्तीफा पत्र में रवि भगत ने लिखा कि एक साधारण ग्रामीण कार्यकर्ता होने के बावजूद भाजपा ने उन्हें संगठन में काम करने का अवसर और सम्मान दिया, जिसके लिए वह पार्टी के प्रति आभारी हैं। हालांकि उन्होंने प्राथमिक सदस्यता छोड़ने के पीछे केवल निजी कारणों का उल्लेख किया है। उन्होंने अपने इस्तीफे की प्रति भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष को भी भेजी है।
शो-कॉज नोटिस के बाद फिर चर्चा में आया मामला
रवि भगत का नाम इससे पहले भी संगठनात्मक अनुशासन से जुड़े मामले में चर्चा में आ चुका है। जुलाई 2025 में भाजपा प्रदेश कार्यालय की ओर से उन्हें सोशल मीडिया पर पार्टी की नीतियों के खिलाफ टिप्पणी करने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में निर्धारित समय के भीतर जवाब देने को कहा गया था और संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। ऐसे में उनके इस्तीफे को उस घटनाक्रम से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

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डीएमएफ फंड को लेकर उठाते रहे सवाल
पिछले कुछ समय से रवि भगत जिला खनिज न्यास (DMF) फंड के उपयोग को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे थे। उन्होंने कई मौकों पर सोशल मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों में फंड के उपयोग और कथित अनियमितताओं को लेकर अपनी राय रखी थी। उनके इन बयानों ने संगठन के भीतर भी चर्चा पैदा की थी। अब इस्तीफे के बाद डीएमएफ फंड से जुड़े मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस का विषय बन गए हैं।
इस्तीफे पर अब तक नहीं आया विस्तृत बयान
रवि भगत के इस्तीफे की प्रति सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। हालांकि उन्होंने अब तक इस्तीफे के पीछे के कारणों पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है। संपर्क करने की कोशिश के बावजूद उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
