धर्म बदलते ही खत्म होगा SC/ST एक्ट का लाभ? हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

SC/ST Act After Religious Conversion

धर्म परिवर्तन और उससे जुड़े कानूनी अधिकारों के संबंध में हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपना धर्म बदलकर इस्लाम स्वीकार करता है, तो वह अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मिलने वाले विशेष संरक्षण का लाभ नहीं ले सकता। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में कानूनी स्थिति का निर्धारण संबंधित व्यक्ति की वर्तमान धार्मिक पहचान के आधार पर किया जाएगा।

घरेलू विवाद से शुरू हुआ मामला अदालत तक पहुंचा

यह मामला परिवार के भीतर चल रहे संपत्ति विवाद से जुड़ा था। विवाद के दौरान महिला ने आरोप लगाया था कि रिश्तेदारों ने उसके साथ मारपीट की और उसकी पूर्व जातिगत पहचान को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं। इसी आधार पर एससी/एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

सुनवाई के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण तथ्य

मामले की सुनवाई में यह तथ्य सामने आया कि महिला के पति ने विवाह के समय विधिवत इस्लाम धर्म स्वीकार किया था और परिवार लंबे समय से मुस्लिम रीति-रिवाजों का पालन कर रहा है। अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और पक्षकारों के बयानों के आधार पर माना कि धर्म परिवर्तन की स्थिति इस मामले के कानूनी मूल्यांकन में महत्वपूर्ण है।

SC/ST Act After Religious Conversion

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सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का किया गया उल्लेख

निर्णय सुनाते समय हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लिए बनाए गए विशेष वैधानिक संरक्षण का लाभ स्वतः जारी नहीं रहता। इसी आधार पर आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज आरोपों को निरस्त कर दिया गया।

अन्य आपराधिक मामलों की सुनवाई जारी रहेगी

अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि एससी/एसटी एक्ट से राहत मिलने का असर मामले में दर्ज अन्य आपराधिक धाराओं पर नहीं पड़ेगा। यदि भारतीय दंड संहिता (IPC/BNS) के तहत लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया बनते हैं, तो आरोपियों को उन मामलों में नियमित न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा।

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