महासमुंद LPG घोटाला: मुंबई के चार लोगों से पूछताछ, फरार आरोपियों को मदद पहुंचाने वालों तक बढ़ी जांच

Mahasamund LPG gas scam

6 कैप्सूल ट्रकों से 92 मीट्रिक टन गैस निकालकर 1.5 करोड़ में बेचने का आरोप, फर्जी दस्तावेज और वजन रिकॉर्ड में विसंगतियां, मुंबई के चार लोग पूछताछ में पेश

 

महासमुंद। करीब 1.5 करोड़ रुपये के एलपीजी गैस गबन मामले में महासमुंद पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। फरार आरोपियों को शरण और मदद देने वालों तक अब जांच का दायरा पहुंच गया है। पुलिस ने मुंबई के चार लोगों को पूछताछ के लिए तलब किया था, जो गुरुवार को जांच टीम के सामने पेश हुए।

 

मुंबई के चार लोगों से पूछताछ

पुलिस के अनुसार, ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और डायरेक्टर सार्थक सिंह ठाकुर की फरारी के दौरान सहायता करने वाले जोगेंद्र सिंह, राजू माइकल, राकेश साह और प्रशांत पाटिल को नोटिस जारी किया गया था। उनसे आरोपियों को उपलब्ध कराई गई आर्थिक, तकनीकी और अन्य मदद के संबंध में पूछताछ की गई ।

 

92 टन गैस और 90 लाख की डील

जांच में सामने आया है कि जब्त 6 गैस कैप्सूलों से करीब 92 मीट्रिक टन एलपीजी गैस निकालकर लगभग 90 लाख रुपये में बेच दी गई थी । बाद में पूरे मामले को वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी पंचनामा और दस्तावेज तैयार किए गए ।

 

Mahasamund LPG gas scam

 

 

दस्तावेजों और वजन रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां

पुलिस जांच के मुताबिक, तत्कालीन खाद्य अधिकारी अजय यादव और भाजपा नेता पंकज चंद्राकर ने गैस की मात्रा का आकलन करने के बाद उसे खपाने की साजिश रची । रायपुर निवासी मनीष चौधरी के माध्यम से ठाकुर पेट्रोकेमिकल से संपर्क कर करीब 90 लाख रुपये में सौदा तय किया गया ।

 

जांच एजेंसियों को दस्तावेजों और वजन रिकॉर्ड में भी गंभीर विसंगतियां मिली हैं, जिससे फर्जीवाड़े और कूट रचना की आशंका और मजबूत हुई है । वहीं, आरोपियों के बीच कथित गोपनीय बैठकों और समान बयान देने की रणनीति बनाए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है ।

 

Mahasamund LPG gas scam

 

 

जेल में हैं अधिकारी, भाजपा नेता समेत कई आरोपी

मामले में तत्कालीन खाद्य अधिकारी अजय यादव, भाजपा नेता पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी, ठाकुर पेट्रोकेमिकल के जिम्मेदार पदाधिकारी समेत कई आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं । पुलिस का कहना है कि मुंबई से पूछताछ के लिए बुलाए गए लोगों से मिले इनपुट के आधार पर जांच में और नए नाम सामने आ सकते हैं ।

 

महासमुंद के इस बहुचर्चित एलपीजी घोटाले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे मामले की नई परतें खुल रही हैं। पुलिस अब उन सभी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आरोपियों को संरक्षण या सहयोग दिया।

 

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